Moneycontrol » समाचार » राजनीति

आवाज़ अड्डा: योगी सरकार में मीडिया बना निशाना!

प्रकाशित Fri, 14, 2019 पर 07:58  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा, ये नारा है उत्तर प्रदेश पुलिस का। लेकिन यूपी में जिस तरह के हालात हैं, उसमें वो किसकी सुरक्षा कर रही है और किसे अंदर करने का संकल्प लिया है, कुछ समझ नहीं आ रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऊपर आपत्तिजनक टिपप्णियों के बाद पत्रकारों को सीधे जेल में डाल देने वाली कार्रवाई पुलिस को ही कटघरे में खड़ा करती है। शामली में एक पत्रकार की बुरी तरह पिटाई पुलिस का दूसरा चेहरा दिखा रही है। पत्रकारों की आवाज दबाने में पुलिस कोई कसर नहीं छोड़ रही है। वहीं दूसरी तरफ राज्य में दिन दहाड़े हत्या और रेप की घटनाएं पूरे पुलिस तंत्र और राज्य सरकार पर सवाल खड़े कर रही हैं। सवाल ये है कि क्या यूपी पुलिस मीडिया को निशाना बना रही है?


उत्तर प्रदेश की दो खबरें योगी सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। एक सूबे के मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर पुलिस बिना किसी शिकायत पत्रकारों को जेल में डाल देती है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पत्रकार प्रशांत कनौजिया की रिहाई हो जाती है। लेकिन एक निजी टीवी चैनल के दो पत्रकार अभी भी जेल के अंदर है। प्रशांत कनौजिया का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि शामली में रेलवे पुलिस के इंस्पेक्टर ने एक पत्रकार की बुरी तरह पिटाई कर दी। बताया जा रहा है कि पत्रकार ने कुछ दिन पहले शामली रेलवे स्टेशन पर अवैध वेंडर्स की खबर दिखाई थी जिसमें इंस्पेक्टर की फजीहत हुई थी। मामले ने तूल पकड़ा तो इंस्पेक्टर साहब सस्पेंड हो गए।


पत्रकारों पर डंडे भांजने वाली पुलिस को राज्य में हो रही हत्या, रेप की बढ़ती घटनाएं सीधे चैलेंज दे रही हैं। अलीगढ़ के पास टप्पल में 2.5 साल की लड़की की हत्या रौंगटे खड़े कर देने वाली है। इसके बाद मेरठ, बाराबंकी, वाराणसी, हमीरपुर और जालौन में नाबालिगों से रेप की दर्दनाक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ताजा मामला आगरा का है जहां कोर्ट परसिर में दिन दहाड़े बार काउंसिल अध्यक्ष की गोली मारकर हत्या कर दी गई। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और बीएसपी प्रमुख मायावती राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कांग्रेस भी योगी सरकार को कटघरे में खड़ा कर रही है।


टप्पल हत्याकांड के बाद से योगी बैठक पर बैठक कर रहे हैं। कानून व्यवस्था की समीक्षा हो रही है। राज्य सरकार का कहना है कानून व्यवस्था चाक चौबंद है। सवाल ये है कि इतने बड़े सूबे की पुलिस आखिर कर क्या रही है? क्या वो पत्रकारों को निशाना बनाने में इतनी व्यस्त हो गई है कि बाकी जगह से ध्यान हट गया है? आपत्तिजनक टिप्पणी सही थी या गलत, इसकी जांच हो सकती है। लेकिन इसके लिए किसी पत्रकार को सीधे जेल में डाल देना जायज है क्या? क्या ऐसा करके राज्य सरकार मीडिया का मुंह बंद करना चाहती है? या पुलिस अपने लिए सॉफ्ट टार्गेट ढूंढ रही है? आवाज अड्डा के इस एपीसोड में इन्हीं सवालों के जवाब खोजने की कोशिश की गई है।