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चुनाव यात्रा: 5 साल में कितनी बदली है काशी नगरी

प्रकाशित Mon, 13, 2019 पर 12:47  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी की हजारों खासियतें हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी को अपना संसदीय क्षेत्र बनाकर एक और खासियत बढ़ा दी। जहां हम ना सिर्फ एक सांसद के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज की समीक्षा करेंगे बल्कि ये भी देखेंगे कि राष्ट्रीय योजनाओं की जमीनी हकीकत क्या है और राष्ट्रीय मुद्दों पर यहां की जनता का मिजाज क्या है।


अगर आप ट्रेन से वाराणसी पहुंचते हैं तो यहां के स्टेशन की खुबसूरती वाराणसी के बदलते चेहरी की गवाही दे रहे होते हैं। पास के स्टेशन मुंडवाडीह की सुविधाओं की तुलना तो एय़रपोर्ट से की जाती है। शहर की ये सड़कें जिनपर पहले बिजली के तारों का जाल बिछा होता था आज खूबसूरत स्ट्रीट लाइट इनकी रौनक बढ़ा रही है। बुनकरों के लिए खास ट्रेनिंग सेंटर और व्यापार केंद्र बनाए गए हैं। शहर से एयरपोर्ट जाने में घंटों लगते थे लेकिन इस फ्लाइओवर के बनने से मुश्किल से 40 मिनट लगते हैं।


शहर की चौड़ी होती सड़कों को देखकर ऐसा लगता है कि शायद अब वाराणसी गलियों का शहर नहीं रह गया। कॉरिडोर को बनाने के लिए जो तोड़ फोड़ की गई उससे लोग नाराज भी दिखे। लेकिन भरोसा है कि आगे सब ठीक हो जाएगा। वाराणसी के गंगा घाट की ये बदली सूरत, घाट की सफाई और सौंदर्यीकरण मोदी के कामकाज का सबसे बड़ा सुबूत है।


इस विकास के बीच वाराणसी का एक युवा चेहरा भी पनप रहा है। वाराणसी में पढ़ी लिखीं सना ने यहां की सांस्कृतिक विरासत की पेंटिंग्स को अपने आजीविका साधन बना लिया है। वाराणसी में पली बढ़ीं सना ने तो यहां के सांस्कृतिक विरासत को अपनी आजीविका का साधन ही बना लिया है और स्थानीय कलाकारों को बेहतर बाजार मुहैया कराने के लिए स्टार्टअप शुरू किया। सना की इस कोशिश ने कई स्थानीय कलाकारों की भी उम्मीदें जगा दी हैं। हालांकि मोदी के संसदीय क्षेत्र होने के नाते अपेक्षाएं थोड़ी ज्यादा हैं। हालांकि 5 साल में इतना बदलाव हुआ कि काशी हिंदु विश्वविद्यालय में स्टार्टअप को तरजीह मिलने लगी है। यानी वाराणसी का सांस्कृति रंग चल पड़ा है आधुनिकता के संग।