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आवाज़ अड्डा: चुनाव में राम मंदिर बनेगा मुद्दा !

प्रकाशित Thu, 07, 2019 पर 10:06  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जहां राम का जन्म हुआ था, मंदिर वहीं बनाएंगे। राम लला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे। 1989 में ये नारा जोर शोर से गूंजना शुरू हुआ और करीब-करीब पूरे देश में छा गया। तब से अब तक न जाने कितने चुनाव हो चुके हैं कितनी सरकारें बन बिगड़ चुकी हैं। लेकिन चुनाव नजदीक आते हैं और अयोध्या में राम मंदिर का मामला फिर गर्म हो जाता है। लेकिन इस बार लगता है कुछ बदल रहा है। इस मुद्दे पर विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस के बीच मतभेद दिख रहा है। वीएचपी ने एक यू-टर्न जैसा एलान किया है कि वो अब चार महीने तक राम मंदिर को लेकर कोई नया आंदोलन नहीं करेगी, यानी चुनाव तक मामला नहीं उठाएगी। उधर आरएसएस चाहता है कि चुनाव में मंदिर मुद्दा बने। लोकसभा चुनाव अब नजदीक हैं। बीजेपी के नेता चुनावी रैलियों में राम मंदिर का जिक्र करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। सवाल ये है अगर राम मंदिर फिर चुनावी मुद्दा बना तो क्या बीजेपी को फायदा होगा?


कुंभ मेले में कुछ दिन पहले संतों ने राम मंदिर के निर्माण को जल्द शुरू करने की हुंकार भरी थी। उन्होंने 21 फरवरी को अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास की घोषणा भी कर दी थी। पर अब विश्व हिंदू परिषद के ताजा रुख से दुविधा पैदा हो गई है। वीएचपी ने चार महीने तक राम मंदिर पर कोई नया आंदोलन नहीं छेड़ने का फैसला किया है।


साधु संतों में राम मंदिर के निर्माण को लेकर अभी भी बेचैनी है। तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास कुंभ में धरने पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि वीएचपी बीजेपी का बचाव कर रही है।


आरएसएस राम मंदिर के मुद्दे पर सरकार के ऊपर अभी भी दबाव बना रही है। आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत का कहना है कि 2014 में राम मंदिर का मुद्दा नहीं भी होता तो भी बीजेपी की सरकार बनती। लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में राम मंदिर का मुद्दा जरूरी है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के तेवर से भी यही लग रहा है कि मंदिर मुद्दे से चुनाव अछूता नहीं रहेगा।


मंदिर निर्माण पर वीएचपी ने जो रुख अख्तियार किया और इसकी जो वजह बता रही है वो गले नहीं उतर रही। इसे लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। क्या मंदिर मुद्दे पर वीएचपी और आरएसएस के बीच मतभेद है? क्या वीएचपी मोदी सरकार को भी कोई मैसेज दे रही है? मंदिर के लिए बेचैन संत समाज भी क्या वीएचपी के फैसले से इत्तेफाक रखता है? 2014 में राम मंदिर बीजेपी के घोषणापत्र का अहम मुद्दा नहीं था। क्या इसकी इस बार घोषणापत्र में जोरदार वापसी होगी? अगर इस बार भी राम मंदिर चुनावी मुद्दा बना तो क्या इस मुद्दे पर बीजेपी को वोट भी मिलेंगे? जबकि वीएचपी के फैसले को लेकर कांग्रेस बीजेपी से जवाब मांग रही है।