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आवाज़ अड्डाः भीड़ का कहर, गोरक्षा के नाम पर गुंदागर्दी!

प्रकाशित Wed, 05, 2018 पर 08:07  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में कुछ अराजक तत्वों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि उन्होंने पूरी कानून व्यवस्था को चुनौती दे दी है। गोकशी के शक में हुई भीड़ की हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह शहीद हो गए जबकि एक अन्य आम नागरिक की भी गोली लगने से मौत हो गई। पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और एसआईटी की जांच चल रही है। शहीद सुबोध कुमार की बहन इस पूरी घटना को साजिश बता रही हैं। और अपने भाई की हत्या के तार दादरी में अखलाक मामले की जांच से जोड़ रही हैं। विपक्षी दलों को योगी सरकार पर हमला करने का हथियार मिल गया है। जबकि योगी सरकार के मंत्री भी उन्हें नहीं बख्श रहे। ऐसे में सवाल ये है कि क्या योगी सरकार में भीड़तंत्र को शह मिल रही है?


बुलंदशहर में भीड़ की हंसा में शहीद हुए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की पत्नी इस सदमे से उबर नहीं पा रही हैं। वो अपने पति की मौत का इंसाफ मांग रही हैं। बुलंदशहर के स्याना क्षेत्र में सोमवार को गोकशी की आशंका के बाद बवाल शुरू हो गया था। कुछ लोग मवेशियों के अवशेष लेकर इकट्ठा हुए और पुलिस से इसकी शिकायत की। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे। इस मामले में एफआईआऱ दर्ज की जा रही थी कि आस-पास के गांव से करीब 400 लोगों की भीड़ ट्रैक्टर-ट्रॉली में कथित गोवंश के अवशेष भरकर चिंगरावठी पुलिस चौकी के पास पहुंच गई और जाम लगा दिया। पुलिस ने भीड़ को रोकने की कोशिश की तो पथराव और गोलीबारी शुरू हो गई। जिसमें इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह शहीद हो गए और एक आम नागरिक की मौत
हो गई। सुबोध कुमार की बहन इस पूरी घटना को साजिश बता रही हैं।


नाराजगी योगी से भी है। गोरक्षा के नाम पर भीड़ जिस तरह उग्र हो रही है उसको लेकर भी उनके सवाल हैं। पुलिस ने इस मामले में 27 लोगों को नामजद किया गया है और 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने अभी तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है। जबकि मुख्य आरोपी योगेश राज फरार है। योगेश राज बजरंग दल का कार्यकर्ता बताया जा रहा है। उस पर लोगों को उकसाने का आरोप है। इस पूरे मामले की जांच एसआईटी कर रही है।


बुलंदशहर की हिंसा को लेकर विपक्षी दल योगी सरकार को घेर रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने इस हिंसा के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया है। जबकि कांग्रेस इसे लोकसभा चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की कोशिश बता रही है।


इस मामले में योगी आदित्यनाथ को अपनों के विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर कह रहे हैं कि ये घटना पूरी प्लानिंग के साथ हुई है।


बुलंदशहर में हिंसा ऐसे समय पर हुई जब आलिमी तब्लिगी इज्तिमा के लिए 10 लाख से ज्यादा मुसलमान इकट्ठा हुए थे। अगर पुलिस ने उन्हें समय पर ना रोका होता तो ये हिंसा बड़े सांप्रदायिक दंगे में बदल सकती थी। सवाल ये है कि क्या बुलंदशहर की हिंसा एक सोची समझी साजिश थी जिसमें सुबोध कुमार सिंह की बलि चढ़ गई? क्या योगी सरकार में भीड़तंत्र को बढ़ावा मिल रहा है? क्या योगी सरकार अराजक तत्वों पर लगाम कस पाएगी। गाय को बचाना तो ठीक है लेकिन क्या ये किसी इंसान की जान लेकर होगा। ये तो ठीक नहीं है?