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आवाज़ अड्डाः सवर्ण बनाम एससी/एसटी के बीच फंसी बीजेपी!

प्रकाशित Tue, 04, 2018 पर 07:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

देश के अलग-अलग हिस्सों में अचानक सवर्णों का गुस्सा फूट पड़ा है। एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ मध्य प्रदेश, राजस्थान, यूपी और बिहार में अगड़ी जातियों के विरोध प्रदर्शन अब सरकारों को परेशान करने लगे हैं। अभी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान निशाना बने हैं, कल कोई और बन सकता है। जाति की राजनीति में सवर्णों की अनदेखी किस पार्टी को कितनी भारी पड़ेगी कहना मुश्किल है। लेकिन इतना साफ है कि इस वक्त यानी चुनावों के पहले ये मुद्दा किसी न किसी को महंगा तो पड़ेगा। पारंपरिक तौर पर अगड़ी जातियों को बीजेपी का वोट बैंक माना जाता है। ऐसे में सवाल ये है कि इस बार क्या सवर्णों की नाराजगी बीजेपी को भारी पड़ेगी?


जन आशीर्वाद यात्रा पर निकले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सड़कों पर सवर्णों का विरोध झेलना पड़ रहा है। एससी-एसटी एक्ट के विरोध में सवर्णों का विरोध प्रदर्शन तेज हो रहा है। सीधी जिले के चुरहट में उनके रथ पर पत्थर फेंके गए। शिवराज सिंह चौहान इसका आरोप कांग्रेस के सिर मढ़ रहे हैं।


कांग्रेस बीजेपी के आरोपों से साफ इनकार कर रही है। कांग्रेस कह रही है कि बीजेपी के खिलाफ पूरे देश में गुस्सा है। सवर्णों के विरोध का सामना बीजेपी और कांग्रेस दोनों के नेताओं को करना पड़ रहा है। गुना में केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत का घेराव किया गया तो ग्वालियर में ज्योतिरादित्य सिंधिया को विरोध झेलना पड़ा। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी एससी-एसटी एक्ट के विरोध में आवाज उठने लगी है। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा और क्षत्रिय महासभा ने तो मध्य प्रदेश में बीजेपी को हराने का संकल्प तक ले लिया है। सोशल मीडिया पर भी सवर्ण ग्रुप एससी-एसटी एक्ट का विरोध कर रहे हैं।


सुप्रीम कोर्ट ने एससी, एसटी एक्ट के प्रावधानों में ढील दे दी थी । इसमें गिरफ्तारी से पहले सीनियर पुलिस अधिकारी से जांच कराए जाने और सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी के लिए उसकी नियुक्ति करने वाले अफसर की अनुमति जरूरी थी। लेकिन केंद्र सरकार ने सहयोगी पार्टियों के दबाव में आकर और अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के गुस्से को ठंडा करने के लिए एससी-एसटी एक्ट में संशोधन करके इसे फिर से कड़ा कर दिया।


सरकार के इस कदम ने सवर्णों को नाराज कर दिया है। इसका खामियाजा बीजेपी को मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। लेकिन जानकारों की मानें तो बीजेपी ने सोच समझकर ये दांव खेला है। पारंपरिक तौर पर सवर्ण बीजेपी के वोटर माने जाते हैं। देश के जातीय समीकरण में इनकी हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी के आसपास ही है। नाराज होकर भी अगड़ी जातियां पूरी तरह बीजेपी से छिटक जाएंगी ऐसा नहीं लगता । इसलिए कोई पार्टी सवर्णों के विरोध प्रदर्शन का खुलकर समर्थन नहीं कर रही । सवाल ये है कि क्या राजनीतिक पार्टियों के लिए अगड़ी जातियां हाशिए पर आ गई हैं। जिनकी कोई परवाह नहीं करना चाहता और क्या सवर्णों को नाराज करके किसी पार्टी को बड़ा नुकसान होने की कई आशंका भी है?