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सिटीजनशिप बिल पर भिड़े BJP- कांग्रेस, बिल का विरोध कितना जायज?

अधीर रंजन को लगता है कि BJP राजनीतिक फायदे के लिए मुसलमानों को टार्गेट कर रही है।
अपडेटेड Dec 03, 2019 पर 11:23  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

इस देश में भला कौन ये कह सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह घुसपैठिए हैं। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने  सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल की आलोचना करने के लिए यही अंदाज चुना है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने इस बेसिर-पैर की बात कहकर ना सिर्फ बेजा बवाल पैदा कर दिया है, बल्कि ये सवाल भी खड़ा कर दिया है कि देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी ऐसी हल्की बातों से क्या साबित करना चाहती है।


लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल के पीछे BJP की मंशा पर सवाल खड़े करते करते, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की नागरिकता पर ही सवाल खड़े कर गए। प्रस्तावित बिल में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के 6 गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है। अधीर रंजन को लगता है कि BJP राजनीतिक फायदे के लिए मुसलमानों को टार्गेट कर रही है।


अधीर रंजन के इस बयान पर BJP सांसदों ने लोकसभा में हंगामा खड़ा कर दिया। सांसदों ने ना सिर्फ अधीर रंजन बल्कि उनकी पार्टी कांग्रेस पर भी अल्पसंख्यक तुष्टिकरण और घुसपैठियों को नागरिकता दिलाने का आरोप लगाया। सोनिया गांधी के विदेशी मूल की याद दिलाकर उन्हें भी घुसपैठिया कहा और पार्टी से बिना शर्त माफी की मांग की है। यही नहीं अमित शाह ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर भी व्यंग किया है।



लेकिन अधीर रंजन बजाए माफी मांगने या सफाई देने के तू-तू-मैं-मैं में उलझे रहे। हो सकता है कि सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल के बहाने PM और गृह मंत्री को घुसपैठिया कहना कांग्रेस के लिए सेल्फ गोल साबित हो, लेकिन बिल में मुसलमानों को जगह ना देने को लेकर सवाल हैं, जिसपर खुद गृह मंत्री न्यूज 18 नेटवर्क के कार्यक्रम एजेंडा झारखंड में सफाई दे चुके हैं।


सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल पर उत्तर पूर्व के राज्यों की और भी शंकाएं हैं। जैसे कि असम समझौते में 1971 तक के शर्णार्थियों की चर्चा है, मगर अब 2014 तक के शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात हो रही है। इसके अलावा आदिवासियों और आदिवासी क्षेत्रों का मसला भी है। गृह मंत्री तमाम पक्षकारों से राय मशविरा कर भी रहे हैं। लेकिन सवाल है कि क्या BJP NRC और सिटीजनशिप बिल के जरिए मुसलमानों को टार्गेट करना चाहती है? लेकिन सरकार की नीयत चाहे जो हो, एक वैध नागरिक को ऐसे कानून से डरने की क्या जरूरत है? क्या मुसलमानों के डर का हौव्वा भी एक राजनीतिक चाल के तहत ही खड़ा किया जा रहा है?


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