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महाराष्ट्र में BJP का बड़ा चुनावी पैतरा, क्या सावरकर दिला पाएंगे जीत!

क्या सावरकर, ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले को भारत रत्न देने का वादा करके बीजेपी को वोट मिलेंगे?
अपडेटेड Oct 16, 2019 पर 13:47  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

भारतीय जनता पार्टी स्वातंत्रय वीर सावरकर को भारत रत्न देना चाहती है, आज बीजेपी ने महाराष्ट्र चुनाव के घोषणा पत्र में इसका एलान भी कर दिया है, उसकी सहयोगी पार्टी शिवसेना पहले ही इसकी मांग कर चुकी है, चुनाव के ठीक पहले इस मामले पर जोरदार बहस शुरु हो गई है, कांग्रेस का आरोप है कि वीर सावरकर अंग्रेजों के पक्षकार थे उन्हें ये सम्मान नहीं मिलना चाहिए, दरअसल सावरकर का नाम कई विवादों में आता है मसलन, अंग्रेजों से चार बार माफी मांगना, गांधी जी की हत्या में शामिल होने का आरोप है, हालांकि कोई भी आरोप साबित नहीं हुआ है, दूसरी बात ये भी है चुनाव में मराठी अ​स्मिता को भुनाने का ये एक तरीका हो सकता है, आज हम इसी पर बहस करेंगे कि क्या वीर सावरकर को भारत रत्न मिलना चाहिए या नहीं और इससे चुनावों में बीजेपी-सेना को कितना फायदा होगा या नहीं होगा।


ये महाराष्ट्र के चुनावी महासंग्राम में अनुच्छेद 370 को मुद्दा बना रही बीजेपी ने एक और बड़ा दांव खेल दिया है। बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में वीर सावरकर को भारत रत्न देने का वादा कर दिया है। इसके अलावा ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले को भी भारत रत्न देने की बात कही है।


सावरकर को लेकर बीजेपी और कुछ विपक्षी पार्टियों के बीच विवाद रहा है। लेकिन सावरकर को भारत रत्न देने के वादे के पीछे बीजेपी के अपने तर्क हैं।


बीजेपी के एलान पर विपक्ष ने कड़ा एतराज जताया है। कांग्रेस ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी का कहना है कि जब इस देश में महात्मा गांधी ने आत्महत्या की लिखा जा सकता है तो कुछ भी हो सकता है। तिवारी का कहना है कि एक लेख में दावा किया गया था कि गांधी की हत्या के लिए कपूर आयोग ने सावरकर को जिम्मेदार माना था। अब इस देश को भगवान ही बचाए।


वहीं AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट करके वीर सावरकर को बीजेपी का अनमोल रत्न बताया। ओवैसी ने लिखा कि सावरकर ने खुद को अंग्रेजों का सबसे आज्ञाकारी नौकर कहा था। कांग्रेस की सहयोगी NCP इसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की बीजेपी की कोशिश बता रही है।
 
महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को वोटिंग है। सवाल ये है कि सावरकर को भारत रत्न देने का वादा देश का मुद्दा है या विधानसभा चुनाव का? क्या इसे बीजेपी के घोषणापत्र का हिस्सा होना चाहिए? क्या बीजेपी के पास जमीनी मुद्दों की कमी है, जो उसे ऐसे मुद्दों का सहारा लेना पड़ रहा है? सवाल ये भी है कि सावरकर को भारत रत्न क्यों नहीं मिलना चाहिए? और क्या सावरकर, ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले को भारत रत्न देने का वादा करके बीजेपी को वोट मिलेंगे?