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CAA-NRC पर मानेंगे या अड़ेंगे प्रदर्शनकारी, शाहीन बाग पर बातचीत से बनेगी बात!

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आज मध्यस्थों का पैनल शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों से बात करने पहुंचा।
अपडेटेड Feb 20, 2020 पर 12:49  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आज मध्यस्थों का पैनल शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों से बात करने पहुंचा। बातचीत शुरू होने से पहले प्रदर्शनकारियों को उम्मीद थी कि मध्यस्थों के रास्ते शाहीन बाग के धरने का हल निकल जाएगा। सबसे पहले वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट का आदेश पढ़कर सुनाया।


वरिष्ठ वकील साधना रामचंद्रन ने प्रदर्शनकारियों को
बताया कि आंदोलन करना उनका मौलिक अधिकार है लेकिन दूसरे नागरिकों के भी अपने अधिकार हैं जिसका उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए। रामचंद्रन ने भरोसा दिलाया कि बातचीत से शाहीन बाग का हल निकल जाएगा।


मध्यस्थों ने मीडिया की मौजदूगी में बातचीत पर आपत्ति जताई। प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक नागरिकता कानून वापस नहीं होता वो शाहीन बाग से हटने वाले नहीं हैं।


कांग्रेस शाहीन बाग के लोगों के साथ है। वो भी सरकार से CAA, NRC और NPR पर पुनर्विचार करने की मांग कर रही है। बीजेपी को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए रास्ता निकलेगा और शाहीन बाग जल्दी खाली हो जाएगा।


वार्ताकारों के साथ प्रदर्शनकारियों की बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। कल फिर बात होगी। लेकिन सवाल है कि शाहीन बाग में क्या कोई बीच का रास्ता नजर भी आता है? क्योंकि गृह मंत्री अमित शाह ने उनकी बात सुनने की मंशा तो जताई है लेकिन सरकार साफ कर चुकी है कि वो CAA को वापस नहीं लेगी। ऐसे में प्रदर्शनकारियों की मांग माने जाने की गुंजाइश नजर नहीं आती है। साथ ही नागरिकता कानून की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में ही सुनवाई होनी है। तो क्या ये पूरा आंदोलन ये दबाव बनाने के लिए हो रहा है कि सरकार आगे कुछ ऐसा ना करे जिससे मुस्लिम समुदाय को परेशानी हो। NRC पर प्रधानमंत्री की सफाई आने के बाद भी ये अंदेशा तो बना हुआ है कि अपनी नागरिकता साबित करने का ज्यादा जिम्मा मुसलमानों पर होगा। ऐसे हालात में अगर प्रदर्शनकारी भी अपनी मांग पर अड़े रहे तो क्या हम इस आंदोलन को आगे भी चलते देखेंगे। आज इसी पर आवाज़ अड्डा में हो रही है बड़ी चर्चा।


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