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क्या केंद्र के नए बिल से अरविंद केजरीवाल सिर्फ नाम के मुख्यमंत्री रह जाएंगे? AAP-BJP में तकरार शुरू

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को लोकसभा में एक विधेयक पेश किया जो उप-राज्यपाल को अधिक अधिकार दिए जाने का प्रावधान है
अपडेटेड Mar 16, 2021 पर 17:47  |  स्रोत : Moneycontrol.com

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को लोकसभा में एक विधेयक पेश किया जो लेफ्टिनेंट गवर्नर (LG) यानी उप-राज्यपाल को अधिक अधिकार दिए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा यह भी स्‍पष्‍ट किया गया है कि राज्‍य कैबिनेट या सरकार के किसी भी फैसले को लागू करने से पहले LG की राय जरूरी होगी। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) विधेयक 2021 को सोमवार को लोकसभा में पेश किया।


यह विधेयक LG को कई विवेकाधीन शक्तियां देता है, जो दिल्ली के विधानसभा से पारित कानूनों के मामले में भी लागू होती हैं। प्रस्तावित कानून यह सुनिश्चित करता है कि मंत्री परिषद (या दिल्ली कैबिनेट) के फैसले लागू करने से पहले उप-राज्यपाल की राय के लिए उन्हें जरूरी मौका दिया जाना चाहिए। मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस विधेयक को अंसवैधानिक और अलोकतांत्रिक करार दिया है। हालांकि, केंद्र में सत्‍तारूढ़ BJP का कहना है कि इससे कोऑर्डिनेशन आसान हो जाएगा। 


दिल्ली सरकार ने बताया खतरनाक


दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोमवार को कहा कि उपराज्यपाल की कुछ भूमिका और शक्तियों को परिभाषित करने वाला केंद्र सरकार का विधेयक लोकतांत्रिक और संवैधानिक रुप से खतरनाक है। उन्होंने साथ में BJP पर पिछले दरवाजे से राष्ट्रीय राजधानी पर शासन करने की कोशिश का आरोप लगाया। सिसोदिया ने कहा कि यह लोकतांत्रिक और संवैधानिक रूप से बहुत खतरनाक संशोधन है। यह दिल्ली के चुनावों और चुनी हुई सरकार को निरर्थक बना देगा।


उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार मामले को देखेगी और कानूनी विशेषज्ञों से सलाह-मशविरे के बाद विकल्प तलाशेगी। सिसोदिया ने कहा कि BJP और उसकी केंद्र सरकार का यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट के फैसले और संविधान को उलट देगा। दिल्ली चुनाव में बुरी तरह हराने और (हाल में MCD उपचुनाव में) एक भी सीट नहीं मिलने के बाद, BJP अब पिछले दरवाजे से दिल्ली पर शासन करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि दिल्ली में निर्वाचित सरकार के पास लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि को छोड़कर अन्य मामलों पर कार्यपालिका शक्तियां हैं।


संशोधन के तहत सभी फाइलें उपराज्यपाल को भेजनी होंगी। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ट्वीट किया है, दिल्ली की जनता द्वारा नकारे जाने (विधानसभा में 8 सीटें और MCD उपचुनाव में 0 सीटें) के बाद BJP लोकसभा में विधेयक के जरिए निर्वाचित सरकार की शक्तियां कम करना चाहती है। विधेयक संविधान पीठ के फैसले के विरुद्ध है। हम BJP के इस असंवैधानिक और लोकतंत्र विरोधी कदम की निंदा करते हैं।


बिल में क्या है प्रस्ताव?


मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रिमंडल को कोई भी कानून लागू करने से पहले उप-राज्यपाल की राय लेना जरूरी होगा। इससे पहले विधानसभा से कानून पास होने के बाद LG के पास भेजा जाता था। अब LG उन मामलों को तय कर सकेंगे जिनमें उनकी राय मांगी जानी चाहिए। दिल्ली विधानसभा के बनाए किसी भी कानून में सरकार का मतलब उपराज्यपाल होगा। विधानसभा या उसकी कोई समिति प्रशासनिक फैसलों की जांच नहीं कर सकती और उल्लंघन में बने सभी नियम रद्द हो जाएंगे।


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