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LJP का असली वारिस कौन? चिराग पासवान और पशुपति पारस की लड़ाई अब चुनाव आयोग पहुंची

चिराग गुट ने शुक्रवार को चुनाव आयोग से मुलाकात कर पार्टी पर अधिकार की दूसरे धड़े की दावेदारी को खारिज किया
अपडेटेड Jun 18, 2021 पर 21:45  |  स्रोत : Moneycontrol.com

लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में पद और प्रतिष्‍ठा को लेकर चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति नाथ पारस की लड़ाई अब चुनाव आयोग में पहुंच गई है। हाजीपुर के सांसद पशुपति नाथ पारस को सर्वसम्मति से LJP का नेता चुने जाने के बाद चिराग पासवान शुक्रवार को लोक जनशक्ति पार्टी के बागियों के खिलाफ अपने समर्थकों के साथ दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय पहुंचे।


वहीं, दूसरी ओर लोजपा पर अपनी दावेदारी पेश करने के लिए पारस भी समर्थकों के साथ गुरुवार को पटना में हुई लोजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध अपने चुनाव के बारे में सूचित करने के लिए चुनाव आयोग पहुंचे। पशुपति पारस ने कहा है कि चिराग अब न तो पार्टी के अध्यक्ष हैं और न ही संसदीय दल के नेता।


पारस ने गुरुवार को असली उत्तराधिकारी के इस लड़ाई में उस वक्त बढ़त बना ली जब उन्हें सर्वसम्मति से नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुन लिया गया, जबकि उनके भतीजे चिराग पासवान के नेतृत्व वाले गुट ने विरोधियों को सबक सिखाने की कसम खाई।


चिराग पासवान गुट ने शुक्रवार को चुनाव आयोग से मुलाकात कर पार्टी पर अधिकार की दूसरे धड़े की दावेदारी को खारिज किया। चिराग पासवान ने चुनाव आयोग को कहा कि कुछ लोगों के निर्णय और बैठकों को न मानें। लोजपा चुनाव आयोग को अपनी गतिविधियों के बारे में  समय-समय परअवगत कराती रही है।


चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात के बाद चिराग ने कहा कि मैं साल 2019 में पांच साल के लोक जनशक्ति पार्टी का अध्यक्ष चुना गया था। उन्होंने कहा कि आयोग ने हमें भरोसा दिया है कि अगर कोई लोजपा के नाम पर दावा करता है तो हमें सुबूत दिखाने का मौका दिया जाएगा।


पार्टी में घमासान सोमवार को तब शुरू हुई थी जब एलजेपी के पांच सांसदों ने पशुपति पारस को संसदीय दल का नेता चुन लिया और उसी रात लोकसभा में भी उन्हें संसदीय दल के नेता के तौर पर मान्यता मिल गई थी। वहीं, अगले दिन मंगलवार को पारस गुट ने चिराग पासवान को LJP के अध्यक्ष पद से हटा दिया था।


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