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चुनाव अड़्डाः बंगाल में हिंसा का जिम्मेदार कौन?

प्रकाशित Thu, 16, 2019 पर 07:54  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

देश के चुनावी इतिहास में पहली बार चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार का समय घटा दिया है। अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा पर एक्शन लेते हुए आयोग ने प्रचार के समय में 1 दिन की कटौती कर दी है। पहले शुक्रवार 5 बजे तक चुनाव प्रचार चलना था, लेकिन अब कल यानि गुरूवार रात 10 बजे ही बंगाल में चुनाव प्रचार खत्म हो जाएगा। इसके अलावा अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के गृह सचिव और CID के ADG को पद से हटा दिया है। आयोग ने हिंसा के दौरान ईश्वरचंद विद्यासागर की प्रतिमा तोड़े जाने की कड़ी निंदा भी की है।


कोलकाता में अमित शाह के रोड शो के दौरान हिंसा को देखते हुए चुनाव आयोग ने चुनाव प्रचार का समय घटा दिया है। पश्चिम बंगाल की 9 सीटों पर कल रात 10 बजे प्रचार खत्म हो जाएगा। बंगाल के गृह सचिव को हटा दिया गया है। और कई बड़े पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले कर दिए गए हैं।


कोलकाता में अमित शाह के रोड शो पर हिंसा को लेकर जब चुनाव आयोग ने कड़ा एक्शन लिया तो ममता बनर्जी चुनाव आयोग पर ही बिफर पड़ीं। उन्होंने चुनाव आयोग के एक्शन पर सवाल उठाए। इसके अलावा कहा कि चुनाव आयोग ने PM मोदी, अमित शाह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि पश्चिम बंगाल सरकार के अफसरों पर कार्रवाई सिर्फ BJP के कहने पर की गई। उन्होंने कहा कि  जनता इसका करारा जवाब देगी। इसके खिलाफ राज्य भर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही जरूरत पड़ी तो चुनाव के बाद सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे।


कल BJP अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा को लेकर  पहले से ब्लेमगेम चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, BJP अध्यक्ष अमित शाह ने सीधे तौर पर इसके लिए ममता बनर्जी और TMC को कसूरवार ठहराया है। वहीं TMC हिंसा के लिए BJP को जिम्मेदार बता रही है। TMC नेता डेरेक ओ ब्रायन ने तो एक वीडियो जारी कर दावा किया कि उनके पास सबूत हैं कि हिंसा को BJP ने भड़काया।


इधर अमित शाह ने ममता बनर्जी को चुनौती देते हुए कहा है कि ममता दीदी आप 23 मई का इंतजार करें, बंगाल की जनता आपको हटाने जा रही है। CPM के महासचिव सीताराम येचुरी ने बंगाल में हुई हिंसा की जांच की मांग की है। और TMC-BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि ये दोनों पार्टियां बंगाल में ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही हैं। वहीं ममता बनर्जी और TMC भी बीजेपी के खिलाफ हमलावर है। कल की हिंसा के लिए TMC बीजेपी को जिम्मेदार बता रही है. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बाहर से लोगों को लाकर हिंसा कराई गई। वहीं शाम में ममता बनर्जी ने भारी पुलिस बंदोबस्त के साथ कोलकाता में पैदल मार्च किया। ममता बनर्जी ने बेलियाघाट से श्यामबाजार तक पैदल मार्च किया।


बंगाल के चुनाव में हिंसा कोई नई बात नहीं है। पंचायत के चुनाव हों या विधानसभा का इलेक्शन। लोकसभा के चुनाव में क्या हाल हो रहा है, सबके सामने है। चुनावी रण में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच सचमुच की तलवारें खिंच गई हैं। और कल की हिंसा के बाद अब दोनों पार्टियों में जबर्दस्त जुबानी जंग और पैंतरेबाज़ी चल रही है। कह सकते हैं कि दोनों ने बंगाल के सवाल पर पूरे देश में बवाल खड़ा कर दिया है।


इससे पहले कल की हिंसा को लेकर आज एक दूसरे के ऊपर आरोप लगाने का सिलसिला चलता रहा। बीजेपी बंगाल की 42 लोकसभा सीटों पर बड़ा दांव खेल रही है। लेकिन ममता बनर्जी बीजेपी के इस खेल को खराब करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही हैं। 19 मई को बंगाल की 9 सीटों पर चुनाव बाकी है जो बीजेपी और टीएमसी दोनों के लिए काफी अहम हैं। सवाल ये है कि चुनाव के दौरान हिंसा से किसे फायदा होगा? बीजेपी को या टीएमसी को।


कोलकाता में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा ने चुनावी माहौल और भड़का दिया है। रोड शो के दौरान बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच जमकर झड़प हुई। हिंसा के दौरान ईश्वरचंद विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने से विवाद और बढ़ गया। अमित शाह और ममता बनर्जी के बीच तलवारें खिंच गई। ममता बनर्जी ने हिंसा के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहरा दिया।
सबूत के तौर पर बीजेपी और टीएमसी ने अपनी अपनी तरफ से हिंसा के वीडियो जारी किए। बीजेपी ने इस पूरे मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की। दिल्ली में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मौन प्रदर्शन किया। वहीं टीएमसी ने कोलकाता में बीजेपी के खिलाफ मार्च निकाला। कॉलेज के स्टूडेंट्स ने अमित शाह के खिलाफ FIR भी दर्ज करा दी। अमित शाह कह रहे हैं कि ममता बनर्जी का खेल खत्म हो चुका है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल में हुई हिंसा को लेकर विपक्षी पार्टियों को घेरा। उन्होंने कहा कि हिंसा पर विपक्ष का मौन चिंताजनक है। उन्होंने ममता बनर्जी की भी आलोचना की।
लेकिन चुनाव के बाद अपने संभावित समर्थक टीएमसी को कांग्रेस नाराज नहीं करना चाहती। लिहाजा उसने बीजेपी को कसूरवार ठहरा दिया है। बंगाल की राजनीति में हाशिए पर सिमटता जा रहा लेफ्ट भी खुलकर ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं बोल रहा है।


बंगाल की जनता सतर्क तो रह सकती है लेकिन क्या वो बेखौफ भी है। बंगाल में जो कहानी बन रही है उससे लगता है कि वहां सत्ता में रहने के लिए हिंसा का सहारा जरूरी हो गया है। और अभी बीजेपी को छोड़ दूसरी पार्टियों को इसपर खास एतराज नहीं है। लेकिन क्या ये खामोशी लोकतंत्र के लिए ठीक है। क्या केंद्र में ममता बनर्जी के संभावित समर्थन के लिए कांग्रेस की चुप्पी उसकी मजबूरी है। क्या राजनीतिक विरोधियों को चुप कराने के लिए तर्कों की जगह लाठी को सही ठहराया जा सकता है। क्या ममता की छवि को ऐसी घटनाओं से धक्का लगेगा  या वो ऐसे नेता के रूप में स्थापित होंगी जो अपने दम पर मोदी शाह की जोड़ी का मुकाबला कर सकती हैं। या ये ममता दी की हर कीमत पर बंगाल में अपनी जमीन बचाए रखने की लड़ाई है।


बंगाल में ममता बनर्जी ने बीजेपी नेताओं की रैलियों को रोकने की बहुत कोशिश की है। अमित शाह और योगी आदित्यनाथ की रैलियों में हेलीकॉप्टर उतरने की अनुमति नहीं दी गई। चुनाव के 6 चरणों में बंगाल से हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं। सवाल ये है कि चुनाव में हिंसा फैलाने से किसको फायदा है? बीजेपी को या टीएमसी को। ममता बनर्जी बंगाल में दूसरी पार्टियों के चुनाव प्रचार में बाधा क्यों डालना चाहती हैं? क्या उन्हें चुनाव में बीजेपी से कड़ी टक्कर मिल रही है? या फिर बंगाल में चुनावी हिंसा राजनीतिक वर्चस्‍व का हथियार बन गया है?