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चुनाव अड्डाः अब चुनाव में चलेगा आखिरी दांव!

प्रकाशित Tue, 14, 2019 पर 08:33  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बहुत लंबे हैं इस बार के चुनाव। मगर फिर भी करीब डेढ़ महीने का ये सफर अब मुकाम पर पहुंचने को है। यानी चुनाव खत्म होने वाले हैं। 19 मई को सातवें और आखिरी दौर की वोटिंग है। पूरा फोकस अब यूपी, पश्चिम बंगाल और पंजाब पर है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। पिछले 6 चरणों में किस पार्टी का पलड़ा भारी है, ये बताना तो इस वक्त बड़े से बड़े पॉलिटिकल पंडित के लिए भी मुश्किल है लेकिन नेताओं के भाषणों में तल्खी बदलते समीकरणों का संकेत दे रही है। ये बदलाव किसके पक्ष में या किसके खिलाफ है, इसका लोग अपने अपने हिसाब से अनुमान लगा रहे हैं। चुनाव का ऊंट किस करवट बैठेगा ये तो 23 मई को पता चलेगा लेकिन सवाल ये है कि क्या ये लोकसभा चुनाव मुद्दों से भटक गया है?


सातवें चरण के करीब चुनाव में बालाकोट, पुलवामा, राष्ट्रवाद की जो हवा दिख रही थी वो अब खत्म होती दिख रही है। मुद्दे गायब हो गए हैं और चुनाव प्रचार व्यक्तिगत हमलों पर आ गया है। चुनाव में कोई लहर किसी के पक्ष में हो, ऐसा दिखता नहीं है। चुनाव के दौरान जमीनी हकीकत की पड़ताल करने वाले रुचिर शर्मा ग्लोबल इंवेस्टर रुचिर शर्मा भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच रहे हैं। उनका मानना है कि यूपी में जाति और धर्म के आधार पर ध्रुवीकरण हो रहा है। जिसकी वजह से बीजेपी को सपा-बसपा गठबंधन से टक्कर मिल रही है। रुचिर शर्मा के मुताबिक पश्चिम बंगाल में बीजेपी को अच्छी बढ़त मिलने की उम्मीद है।


इन सबके बीच गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेस दलों की नजदीकी भी बढ़ रही है। केसीआर ने डीएमके प्रमुख स्टालिन से मुलाकात की और तीसरे मोर्चे की अटकलों को और हवा दे दी है। अपने दम पर ये सरकार भले ही ना बना पाएं लेकिन सरकार बनाने में मोल भाव करने में तीसरे मोर्चे की स्थिति मजबूत होगी। असल में इस चुनाव में कई फैक्टर एक साथ काम कर रहे हैं। और यही राजनीतिक विश्लेषकों का काम मुश्किल बना रहा है। तो क्या ये चुनाव हर इलाके की एक अलग तस्वीर पेश करेगा जिसका सिर्फ एक सिरा जुड़ा होगा, और वो है मोदी प्रेम या मोदी से मुखालफत?