Moneycontrol » समाचार » राजनीति

SC का नागरिकता संशोधन कानून पर रोक से इनकार, केंद्र को जवाब के लिए 4 हफ्ते का वक्त

चीफ जस्टिस ने कहा कि हम सरकार को प्रोविजनल नागरिकता देने को कह सकते हैं लेकिन इस पर एकतरफा रोक नहीं लगा सकते हैं
अपडेटेड Jan 22, 2020 पर 16:53  |  स्रोत : Moneycontrol.com

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ देश भर में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 140 से ज्यादा याचिका दायर की गई हैं। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।


सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोब्डे (SA Bobde) की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने इस मामले में अपना फैसला दिया है। याचिकाएं ज्यादा थीं, लिहाजा सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में खचाखच भीड़ थी।


सरकारी वकील ने कहा, CAA के खिलाफ 144 याचिकाएं दायर की गई हैं। इस पर चीफ जस्टिस बोब्डे ने कहा कि भीड़ होने की वजह से सभी लोग कोर्ट रूम में नहीं आ सकते हैं। लेकिन हम सभी पक्षों से बात करेंगे। लोगों के साथ सलाह मश्विरा किया जा सकता है।


सु्प्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सरकार का पक्ष सुने बगैर वह नगारिकता संशोधन कानून (CAA) पर रोक नहीं लगा सकते हैं। चीफ जस्टिस एसए बोब्डे की अध्यक्षता में तीन जजों की बेंच ने 143 याचिकाओं पर सुनवाई की। अपने फैसले में उन्होंने सरकार को जवाब देने के लिए एक महीने का वक्त दिया है।


चार हफ्ते की अवधि पूरी होने के बाद पांचवें हफ्ते में तीन जजों की बेंच सुनवाई करेगी। वहीं पांच जजों की एक बेंच अंतरिम राहत और मेरिट पर सुनवाई करेगी।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि असाम और त्रिपुरा के मामले को भी इसमें जोड़ दिया गया है। जबकि इस पर अलग से सुनवाई होगी। कोर्ट ने सीनियर वकील कपिल सिब्बल को इन मामलों की पहचान करने में मदद करने को कहा है।


इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के हाई कोर्ट पर CAA पर कोई ऑर्डर पास करने पर रोक लगा दी है।


सुनवाई के दौरान अटर्नी जनरल (सरकारी वकील) केके वेणुगोपाल ने दलील थई कि केंद्र सरकार को अभी 143 याचिकाओं में से सिर्फ 60 की कॉपी मिली है। लिहाजा उन्हें हलफनामा दायर करने के लिए ज्यादा वक्त चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा कि इस मामले को संवैधानिक बेंच को भी सौंपा जा सकता है।


सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ताओं की तरफ से पैरवी की। वह चाहते थे कि इस मामले को तीन हफते के लिए टाल दिया जाए।


 इस मामले में कपिल सिब्बल ने कहा, "पहले यह तय किया जाए कि इस मामले को संवैधानिक पीठ को भेजा जाना चाहिए या नहीं। हम रोक नहीं मांग रहे हैं लेकिन इसे तीन हफ्ते के लिए टालने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर फरवरी में सुनवाई की कोई तारीख तय की जाए।"


इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि हम सरकार को प्रोविजनल नागरिकता देने को कह सकते हैं लेकिन इस पर एकतरफा रोक नहीं लगा सकते हैं।


सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।