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Citizenship Bill: 8 घंटे की बहस के बाद राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास हुआ

नागरिकता संशोधन बिल को सेलेक्ट कमिटी में भेजने का प्रस्ताव गिरा
अपडेटेड Dec 12, 2019 पर 08:20  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Citizenship amendment bill। लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी नागरिकता संशोधन बिल पास हो गया है। इस बिल पर राज्यसभा में भी जबरदस्त बहस हुई थी। इस बिल के पक्ष में 117 वोट पड़े जबकि इसके खिलाफ सिर्फ 92।


इस बिल को सेलेक्ट कमिटी में भेजने को लेकर वोटिंग हुई जो पास नहीं हो पाया। इस बिल को सेलेक्ट कमिटी में भेजने के विरोध में 124 वोट पड़े थे। जबकि इसके पक्ष में सिर्फ 99 वोट पड़े। शिवसेना ने इस वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया है। TMC की तरफ से डेरेक ओ ब्रायन ने बिल में संशोधन का प्रस्ताव रखा था लेकिन यह प्रस्ताव भी गिर गया। राज्यसभा में संशोधन के कुल 14 प्रस्तावों पर वोटिंग हुई है। इस बिल के पास होने पर सोनिया गांधी ने इतिहास का काला दिन करार दिया है।


गृहमंत्री अमित शाह ने यह बिल पेश करके कहा कि यह बिल एंटी-माइनॉरिटी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह अफवाह है कि यह बिल मुस्लिमों के खिलाफ है। छह घंटों से ज्यादा वक्त से लगातार चल रही बहस में शाह ने कहा कि मोदी सरकार देश को सुधारने आई है। अगर कांग्रेस ने धर्म के आधार पर विभाजन नहीं किया होता तो यह बिल लाने की जरूरत नहीं पड़ती।


अमित शाह ने यह बिल पेश करके कहा कि यह बिल पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए उन लाखों शरणार्थियों के लिए आशा की किरण है, जो भारत में बिना किसी परमानेंट रेजीडेंसी के रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग यहां नहीं आए, उन्हें वहां अत्याचार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में इस बिल से उन्हें आखिरकार ऐसे लोगों और उनके परिवारों को अधिकार मिलेंगे।


शाह ने कहा कि उन पर आरोप लग रहे हैं कि बीजेपी इस बिल के जरिए वोट बैंक की पॉलिटिक्स कर रही है। लेकिन हम यह बिल 2019 लोकसभा चुनावों के पहले ही ले आए थे। जहां तक नॉर्थ ईस्ट की बात है, उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा।


शाह ने यह भी कहा कि देश के मुस्लिमों की इसकी चिंता नहीं करनी है। उन्होंने कहा कि यह अफवाह फैलाई जा रही है कि यह बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ है। इस देश में रह रहे मुस्लिमों को चिंता करने की जरूरत नहीं है लेकिन पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आ रहे मुस्लिमों को भारत की नागरिकता नहीं दी जा सकती।


कांग्रेस ने दिए हैं ये तर्क


इस बिल के विरोध में कांग्रेस के सांसद आनंद शर्मा ने बोला है। शर्मा ने कहा कि यह बिल सबसे पहले तो संविधान के खिलाफ जाता है। यह बिल लाकर संविधान निर्माताओं का अपमान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस एक्ट में 1955 से संशोधन किए जा रहे हैं लेकिन इसकी बुनियादी चीजों से कभी छेड़छाड़ नहीं की गई है। जब भी संशोधन हुआ है, धर्म को इसका आधार कभी नहीं बनाया गया है। आर्टिकल 14 नागरिक को कानून के सामने समानता का अधिकार देता है। लेकिन यह बिल संविधान की इस परीक्षा में फेल है। आप कहते हैं कि हमें राजनीति से ऊपर उठना चाहिए लेकिन हम आग्रह कर रहे हैं कि आप इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करें।


उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कभी टू नेशन थ्योरी कभी जिन्ना नहीं ले आए थे, यह थ्योरी सबसे 1937 में गुजरात में हिंदू महासभा ने सामने रखा था। उन्होंने कहा- आप ब्रिटिशर्स की बात क्यों नहीं कर रहे? उन्होंने ही मुस्लिम लीग को बढ़ावा दिया था। ब्रिटिशर्स ने कांग्रेस को बैन करके मुस्लिम लीग और हिंदू महासभा को टू नेशन थ्योरी आगे बढ़ाने के लिए बढ़ावा दिया था।


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