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नागरिकता संशोधन बिल पेश करने को लेकर हुई वोटिंग, 293 सांसदों ने पक्ष में डाला वोट

कांग्रेस ने कहा है कि यह बिल देश के अल्पसंख्यका समुदायों को टारगेट करने के लिए लाया जा रहा है
अपडेटेड Dec 10, 2019 पर 09:05  |  स्रोत : Moneycontrol.com

गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill)  पेश किया है। इस बिल के पेश किए जाने को लेकर लोकसभा में वोटिंग हुई है। वोटिंग प्रक्रिया में 293 सासंदों ने समर्थन में वोट डाला है, वहीं 82 सांसदों ने इसके विरोध में 82 वोट पड़े हैं। संभावना जताई जा रही है कि आज ही लोकसभा में यह बिल पास भी हो जाएगा।


इस बिल पर उठ रहे विवाद के बीच अमित शाह ने कहा कि यह बिल अल्पसंख्यक समुदाय (minorities) के खिलाफ एकदम नहीं है। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल अल्पसंख्यकों के 0.001% भी खिलाफ नहीं है।


अमित शाह ने यह जवाब कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी के उस बयान पर दिया, जिसमें उन्होंने इस बिल के विरोध में कहा कि यह बिल देश के अल्पसंख्यक समुदायों को टारगेट करने के लिए लाया जा रहा है। शाह ने विपक्ष के विरोध पर कहा कि वो विपक्ष के हर सवालों का जवाब देने को तैयार हैं, बस विपक्ष बहस से वॉकआउट न करे।


शाह ने कहा कि बिल पर चर्चा होगी, बिल के मेरिट पर नहीं। उन्होंने कहा कि यह बिल आर्टिकल 14 का उल्लंघन नहीं करता है।


बता दें कि इस प्रस्ताव इस छह दशक पुराने नागरिकता कानून में संशोधन लाया जाएगा। इस कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हुए शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी गई थी। इस संशोधन में प्रस्ताव है कि 31 दिसंबर, 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हुए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध शरणार्थी मानने की बजाय उन्हें भारतीय नागरिकता दिया जाए।


इस बिल को कैबिनेट ने पिछले हफ्ते मंजूरी दे दी थी। बीजेपी ने सोमवार को अपने सांसदों को व्हिप जारी कर लोकसभा में मौजूद रहने को कहा है।


उधर विपक्ष इस बिल का जोरदार विरोध कर रहा है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, CPI, IUML, DMK, RJD, CPM और तृणमूल इस पर विरोध कर रहे हैं। इन पार्टियों ने इस बिल के लिए आठ बिंदुओं की रणनीति सुझाई है।


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, CPM दो संशोधन पेश कर सकता है, जिसमें एक प्रस्ताव नागरिकता के लिए योग्य घोषित किए जाने वाले लोगों के धर्म का नाम हटाने का है। तृणमूल कांग्रेस इस बिल के विरोध में नोटिस डालने वाली है।




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