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Electoral Bonds पर कांग्रेस का जबरदस्त विरोध, बताया 'राजनीतिक घूस योजना'

कांग्रेस का आरोप- भारतीय रिजर्व बैंक और चुनाव आयोग के विरोध के बावजूद केंद्र सरकार ने चुनावी बॉन्ड जारी किए
अपडेटेड Nov 22, 2019 पर 08:59  |  स्रोत : Moneycontrol.com

इलेक्टोरल बॉन्ड का विरोध कर रही कांग्रेस ने चुनावी बॉन्ड का मुद्दा गुरूवार को लोकसभा में उठाया। पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार पर इस योजना के जरिए सरकारी भ्रष्टाचार को अमलीजामा पहनाने का गंभीर आरोप लगाया। पार्टी ने इस मामले पर विरोध करने के बाद सदन से वॉकआउट कर दिया।


शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दावा किया कि भारतीय रिजर्व बैंक और चुनाव आयोग के विरोध के बावजूद केंद्र सरकार ने चुनावी बॉन्ड जारी किए और उसके माध्यम से सरकारी भ्रष्टाचार को अमलीजामा पहनाया गया।


उन्होंने कहा- 2017 के बजट में घोषणा के बाद जब यह योजना लागू की गई थी तो इसे केवल लोकसभा चुनाव तक सीमित रखा गया था। हालांकि, अप्रैल 2018 में कर्नाटक चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर (इसे बदल दिया गया)।


लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तिवारी को टोकते हुए कहा कि किसी का नाम नहीं लिया जाए। उन्हें इसके बाद बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इस पर तिवारी कहते सुने गए कि उनके पास आरटीआई से मिले कागज हैं और वह सदन के पटल पर रखने को तैयार हैं।


तिवारी और कांग्रेस के अन्य सदस्यों ने उन्हें बात पूरी करने की अनुमति देने की मांग की, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया। इस पर विरोध जताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत विपक्षी दल के सदस्यों ने सदन से वाकआउट कर दिया।




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