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राहुल गांधी से बोले हेल्थ एक्सपर्ट, 2021 तक भारत में रहेगा कोरोना वायरस

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हेल्थ एक्सपर्ट प्रोफेसर आशीष झा और प्रोफेसर जोहान गिसेक से कोरोना वायरस महामारी से संबंधित बातचीत की
अपडेटेड May 28, 2020 पर 10:40  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कोरोना वायरस से पूरी दुनिया तबाह है। भारत देश भी कोरोना काल से गुजर रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस समय कोरोना के इस संकट की घड़ी में लगातार एक्टिव दिखाई दे रहे हैं। राहुल गांधी लगातार सरकार की नीतियों पर हमला कर रहे हैं। अब उन्होंने सीरीज की शुरुआत कर दी है। पहले उन्होंने अर्थव्यवस्था पर चर्चा की औब हेल्थ से जुड़े ग्लोबल एक्सपर्ट के साथ चर्चा की। राहुल ने हेल्थ से जुड़े मसलों पर चर्चा की। इसका उन्होंने पूरा 30 मिनट का वीडियो अपने यूट्यब चैनल में अपलोड किया है।


आधे घंटे के इस वीडियो में राहुल ने शुरुआती 20 मिनट से ज्यादा की बातचीत हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आशीष झा (Professor Ashish Jha) से की। इसके बाद उन्होंने स्वीडन के प्रोफेसर जोहान गिसेक (Johan Giesecke) से बात की।


इसी चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर झा से मजाकिया अंदाज पूछा - भैया, वैक्सीन कब आएगी?


इस बातचीत में राहुल गांधी ने एक्सपर्ट्स से कहा कि भारत में कोरोना वायरस से निपटने के लिए राज्य को अधिक से अधिक अधिकार देने की जरूरत है। आशीष झा ने कहा कि आर्थिक गतिविधियां शुरू करते समय लोगों के भीतर भरोसा पैदा करने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि भारत में कोरोना जांच के लिए एक रणनीति बनाने की जरूरत है। झा ने कहा कि कोरोना वायरस का असर इकोनॉमी और हेल्थ पर पड़ता है। सरकार को इस ओर खास तौर से ध्यान देने की जरूरत है। लॉकडाउन का मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है। उन्होंने सरकार को सलाह देते हुए कहा कि जब लॉकडाउन घोषित करते हैं तो जनता में मैसेज जाता है कि स्थिति बेहद खराब है। ऐसे में जब हम लॉकडाउन खोले तो लोगों केभीतर भरोसा पैदा करना जरूरी है।


उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस एक-दो महीने में नहीं जाएगा, ये 2021 तक रहने वाला है। राहुल गांधी ने पूछा कि भैया वैक्सीन कब आएगी, तब झा ने कहा कि उम्मीद है कि अगले साल तक ही कोई दवा या टीका आ पाएगा। रोजाना कमाने वाले मजदूरों के पास मदद पहुंचाने की जरूरत है, ताकि उन्हें भरोसा हो सके कि कल अच्छा होगा। लॉकडाउन से क्या नुकसान होगा इसका किसी को नहीं पता, लेकिन आप नुकसान को कम करने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लिए अच्छी बात यह है कि उसके पास बड़ी संख्या में यंग लोगों की आबादी है। जिसके लिए कोरोना घातक नहीं होगा। सीनियर सिटीजन्स और अस्पतालों में भर्ती लोगों का खास तौर ख्याल रखने की जरूरत है।


स्वीडन के प्रोफेसर एमिरेटस जोहान गिसेक ने भी इस वायरस के अगले कई महीनों तक मौजूद रहने की बात कही है। हालांकि यह भी कहा कि यह एक मामूली बीमारी है जो 99 फीसदी लोगों के लिए गंभीर बीमारी नहीं है। भारत में घोषित लॉकडाउन पर जोहान ने कहा कि इस तरह के लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था चौपट हो जाएगी। लॉकडाउन में ढील देने की जरूरत है।


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