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उद्योग नगरी भरूच का चुनावी नजरिया

प्रकाशित Sat, 20, 2019 पर 13:35  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

वैसे तो गुजरात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गढ़ कहा जाता है। लेकिन ज्यादातर बिजनेस-व्यापार पर चलने वाले इस राज्य में कारोबारी अपने लिए बेहतर माहौल चाहते हैं। भरूच देश के सबसे बड़े औद्योगिक इंडस्ट्रियल एस्टेट में से एक है। भरूच में गडिया, पनोली, अंकलेश्वर और दहेज जैसे चार बड़े इंडस्ट्रियल एस्टेट है। आज से 10 साल पहले अंकलेश्वर और पनोली विश्व के 2 सबसे ज्यादा दूषित एस्टेट माने गए थे। लेकिन अब हालत सुधर गए है। खास कर पिछले 3 सालों में सरकार ने यहां के उद्योगों को काफी मदद की है।


भरूच और इसके आसपास के इंडस्ट्रियल एस्टेट में 8000 से भी ज्यादा यूनिट है। यहां पर खास कर केमिकल, फार्मा और इंजीनियरिंग क्षेत्र के छोटे मझोले यूनिट हैं। जीएसटी लागू होने के शुरूआती दौर में यहां के कारोबारी नाखुश थे। लेकिन अब उन्हें लगता है जीएसटी से छोटे और मझोले कारोबारियों को काफी फायदा हुआ है। यहां हर यूनिट में औसतन 20 से 25 लोगों को रोजगार मिला हुआ है यानि करीब 2 लाख लोग इन छोटे और मझोले यूनिट्स से अपना परिवार चलाते है। कारोबारी मानते हैं कि 72000 सालाना देने वाली कांग्रेस की न्याय स्कीम बेरोजगारी बढ़ाएगी और इसके चलते उन्हें कारीगरों की किल्लत हो सकती है।


भरूच और इसके आसपास के इलाको में 4 बड़ी जी आई डी सी है जिसमे 8000 से भी ज्यादा यूनिट है। इनके लिए एहम है पर्यावरण और इन्फ्रास्ट्रक्चर का मुद्दा। लेकिन सबसे बड़ी चिंता है इन्हें रोजगार की। उनको लगता है कि कांग्रेस की सालाना 72000 रुपये की योजना और एक मनरेगा साबित हो सकती है।