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प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न मिला, नानाजी देशमुख को मरणोपरान्त मिला सम्मान

इस साल जनवरी में प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न के लिए चुना गया था। यह देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है
अपडेटेड Aug 09, 2019 पर 09:06  |  स्रोत : Moneycontrol.com

देश के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न का सम्मान दिया गया। यह सम्मान उन्हें राष्ट्रपति भवन में रामनाथ कोविंद ने दिया है। उनके अलावा सोशल एक्टिविस्ट नानाजी देशमुख को भी इस सम्मान से नवाजा गया है। देशमुख को यह सम्मान मरणोपरान्त मिला है।


इस साल जनवरी में प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न के लिए चुना गया था। यह देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है।


पीएम नरेंद्र मोदी ने इस सम्मान के लिए प्रणब मुखर्जी को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट करके कहा है कि प्रणबदा अपने वक्त के सबसे दिग्गज नेता हैं। उन्होंने निस्वार्थ भाव से देश की सेवा की है। उनके बौद्धिक ज्ञान से देश का विकास हुआ है। मुझे बेहद खुशी है कि उन्हें यह सम्मान दिया गया है। इस साल जनवरी में ही सरकार ने प्रणब मुखर्जी, नानाजी देशमुख और भूपेन हजारिका को यह सम्मान देने का ऐलान किया था।


नानाजी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रहे, लेकिन उन्होंने समाजसेवा का भी काम किया। इनका शुमार देश के बड़े विचारकों में है।


प्रणब मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गांव मिराटी में एक ब्राह्मण परिवार में 11 दिसंबर 1935 में हुआ था. प्रणब मुखर्जी के पिताजी कामदा किंकर मुखर्जी क्षेत्र के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे. आज़ादी की लड़ाई में वो 10 सालों से ज्यादा समय तक ब्रिटिश जेलों में कैद रहे. प्रणब मुखर्जी के पिता 1920 से इंडियन नेशनल कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता थे. अपने पिता से ही प्रेरणा लेकर प्रणब मुखर्जी राजनीति में आए थे।


सिनेमा, संगीत और कला के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए मशहूर डॉक्टर भूपेन हज़ारिका को भारत रत्‍न दिया जाएगा.