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CAA पर सरकार और विपक्ष में आर-पार, कैसे खत्म होगा प्रदर्शन?

लखनऊ में विरोध प्रदर्शन के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता कानून के समर्थन में अभियान आगे बढ़ाया।
अपडेटेड Jan 22, 2020 पर 13:55  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

लखनऊ में विरोध प्रदर्शन के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता कानून के समर्थन में अभियान आगे बढ़ाया। मसला नागरिकता कानून का था और निशाने पर विपक्षी पार्टियां। अमित शाह ने कहा कि विपक्षी पार्टियां नागरिकता कानून के खिलाफ गलत प्रचार कर रही हैं। उन्होंने एक बार फिर साफ कर दिया कि सरकार किसी कीमत पर नागरिकता कानून वापस नहीं लेगी।


गृह मंत्री ने विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा के लिए कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि CAA की वजह से देश के मुसलमानों की नागरिकता नहीं जाएगी। उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी है कि वो कभी भी चर्चा के लिए तैयार हैं।


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को प्रायोजित बताया और इधर कांग्रेस भी सच-झूठ का ही मुद्दा उठा रही है। पार्टी ने नागरिकता कानून और NRC को लेकर मोदी सरकार पर 9 झूठ बोलने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि नागरिकता कानून धर्म के आधार पर भेदभाव करता है और असंवैधानिक है। कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने CAA पर चर्चा के लिए अमित शाह की चुनौती स्वीकार कर ली है।


समाजवादी पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार नागरिकता कानून के बहाने मुसलमानों के साथ-साथ दलित और पिछड़ों को निशाना बना रही है।
 
सवाल है कि क्या नागरिकता कानून का विरोध करने वालों और सरकार के बीच मामला फंस गया है? क्या ये लड़ाई उस मुकाम पर पहुंच गई है जहां से किसी के लिए पीछे हटना मुमकिन नहीं है? जो लोग धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं उनके लिए वो क्या रास्ता है जिसके बाद वो अपना आंदोलन वापस ले लेंगे? इस गतिरोध को खत्म करने का आखिर उपाय क्या है?