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INX Media Case: जानिए गिरफ्तारी के बाद चिदंबरम के पास क्या है कानूनी रास्ते

पी चिदंबरम को अब निचली अदालत से जमानत लेनी होगी। अगर जमानत खारिज होती है, तब वो ऊपरी अदालत में अपील कर सकते हैं।
अपडेटेड Aug 22, 2019 पर 16:47  |  स्रोत : Moneycontrol.com

देश के पूर्व गृह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम अब पूरी तरह से कानूनी जाल में फंस चुके हैं। दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत अर्जी खारिज होते ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चिदंबरम  CBI और ED से लुका छिपी का खेल खेल रहे थे।


बुधवार रात को CBI ने चिदंबरम को गिरफ्तार किया और रात भर उनसे पूछताछ हुई। अब आज गुरुवार को CBI चिदंबरम को कोर्ट में पेश करेगी। जहां पूरी संभावना व्यक्त की जा रही है कि CBI चिदंबरम को हिरासत में मांगेगी। अधिकतम हिरासत 14 दिन की होती है। ऐसे में जब तक चिदंबरम हिरासत में रहेंगे तब तक उनकी जमानत नहीं होगी।
हिरासत खत्म होने के बाद चिदंबरम की कानूनी टीम को निचली अदालत से जमानत के लिए अर्जी देनी होगी। यदि जमानत यहां से खारिज हो जाती है, तब फिर हाईकोर्ट का रूख करना होगा।


इधर CBI के बाद ED भी गिरफ्तार कर सकती है। यदि चिदंबरम जेल में रहेंगे तो ED को कोर्ट से हिरासत की मांग करनी होगी। जिसमें ED को बताना होगा कि उन्हें भी पूछताछ करनी है।


अगर चिदंबरम को हाईकोर्ट से जमानत मिल जाती है, तब CBI ऊपरी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दे सकती है। 


पी चिदंबरम गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाए थे, जहां उन्होंने इस मामले में जल्द ही सुनवाई की मांग की थी। चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत की मांग की थी। जिसकी सुनवाई शुक्रवार को होनी है। लेकिन अब इस मामले में कोई दम नहीं रह गया। क्यों कि चिदंबरम गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट गए थे। अब गिरफ्तार हो चुके हैं, लिहाजा अग्रिम जमानत का कोई औचित्य नहीं रह जाता ।   


आपको बता दें कि पी चिदंबरम यूपीए (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सरकार में गृह मंत्री और वित्त मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। चिदंबरम सात बार लोकसभा सदस्य रह चुके हैं। मौजूदा समय पी चिदंबरम राज्य सभा सदस्य हैं।
  
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