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करतारपुर कॉरिडोर मामला: सर्विस फीस को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत बिगड़ी

तीसरे चरण की बातचीत में दोनों देशों के बीच फीस और कुछ दूसरे मामलों को लेकर मतभेद है
अपडेटेड Sep 04, 2019 पर 19:08  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अटारी के प्रस्तावित करतारपुर कॉरिडोर के लिए तीर्थयात्रियों से कितनी सर्विस फीस ली जाए, इसको लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच सहमति नहीं बन पाई है। इस ड्राफ्ट एग्रीमेंट पर बुधवार को साइन होना था लेकिन तीसरे चरण की बातचीत के बाद माहौल और बिगड़ गया।


पाकिस्तान नहीं चाहता कि करतारपुर गुरुद्वारा में इंडियन कॉन्सुलर या प्रोटोकॉल अधिकारी आएं। वहीं दूसरी तरफ इंडिया तीर्थयात्रियों से लिए जाने वाले सर्विस फीस पर पाकिस्तान के साथ सहमत नहीं है।


हालांकि दोनों देश इससे पहले यात्रियों के वीजा-फ्री यात्रा को लेकर सहमत हो गए थे। दोनों देश इस बात को लेकर राजी थे कि हर साल करतारपुर कॉरिडोर के रास्ते 5000 तीर्थयात्री करतारपुर गुरुद्वारा जा सकते हैं। इसके अलावा खास मौकों पर अतिरिक्त यात्रियों को भी करतारपुर कॉरिडोर के रास्ते करतारपुर गुरुद्वारा जाने का मौका मिलता। हालांकि यह पाकिस्तान के हाथ में होता कि वह कितने अतिरिक्त यात्रियों के लिए अनुमति देता है। 


OCI (ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया) वाले भारतीय मूल के नागरिक भी करतारपुर कॉरिडोर के रास्ते गुरुद्वारा साहेब के दर्शन करने जा सकते हैं। भारतीय और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच यह बातचीत वाघा बॉर्डर-अटारी बॉर्डर के भारतीय सीमा में हुई है।



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