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मतदान से मतगणना तक का सफरनामा

EVM के वोटों की गिनती शुरु करने से पहले पोस्टल बैलट यानि डाक से आए मतपत्रों की गिनती की जाती है।
अपडेटेड May 22, 2019 पर 11:10  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

17वीं लोकसभा में कौन कौन जीतेगा, किस पार्टी की सरकार बनेगी। इसपर से 23 मई को पर्दा उठेगा। मगर क्या आप जानते हैं कि कैसे होती है वोटों की गिनती।  आईए आपको बताते हैं। वोटिंग के बाद जनता की ड्यूटी खत्म हो जाती है लेकिन चुनाव आयोग की ड्यूटी का सबसे कठिन दौर शुरू होता है।


वोटिंग खत्म होने के तुरंत बाद EVM को राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधि और सेक्शन ऑफिसर की मौजूदगी में सील कर दिया जाता है और फिर GPS से लैस वाहनों में इन्हें स्ट्रांग रूम तक पहुंचाया जाता है। हर लोकसभा सीट के लिए एक स्ट्रांग रूम बनाया जाता है, जहां तीन स्तर की सुरक्षा के बीच EVM को रखा जाता है। इस तीन स्तरीय सुरक्षा में पैरामिलट्री फोर्सेज, स्टेट पुलिस और लोकल पुलिस शामिल होती है।


EVM के वोटों की गिनती शुरु करने से पहले पोस्टल बैलट यानि डाक से आए मतपत्रों की गिनती की जाती है। EVM से मतगणना के लिए हर काउंटिंग हॉल में 14-14 टेबल लगाई जाती हैं। पहले से तय चार्ट के मुताबिक हर टेबल पर एक बूथ की EVM मशीन रखी जाती है। ईवीएम लाने के बाद उम्मीदवारों के काउंटिंग एजेंट को मशीन पर लगी सील दिखाई जाती है और फिर उसे तोड़ा जाता है और गिनती शुरू होती है। वोटों की गिनती में लगे सरकारी कर्मचारियों और वहां मौजूद उम्मीदवारों के एजेंटों के बीच एक जाल लगा होता है जहां से एजेंट लगातर गिनती होते हुए देख सकते हैं।


एक राउंड की गिनती के बाद काउंटिंग एजेंट को 2 मिनट का वक्त दिया जाता है जिसमें वो अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपत्तियों का निपटारा करने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ऑब्जर्वर की इजाजत लेता है और उस राउंड के नतीजों की घोषणा करता है।


ईवीएम मशीनों को काउटिंग यूनिटस तक लाने और वोटों की गिनती खत्म होने तक कोई चूक न हो और पूरी तरह से पारदर्शिता बरती जाए, इसके लिए पूरी प्रकिया की विडियोग्राफी की जाती है। हर राउंड के बाद नतीजो के बारे मे राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सूचना दी जाती है। यह सिलसिला मतगणना खत्म होने के बाद तक चलता रहता है।