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Maharashtra Tussle: आज शिवसेना की याचिका पर सुनवाई, पार्टी को NCP-कांग्रेस के लेटर ऑफ सपोर्ट का इंतजार

शिवसेना ने कोर्ट में बहुमत साबित करने के लिए गवर्नर की ओर से और वक्त न दिए जाने के खिलाफ याचिका दाखिल की है
अपडेटेड Nov 13, 2019 पर 17:18  |  स्रोत : Moneycontrol.com

महाराष्ट्र में अगले छह महीनों के लिए राष्ट्रपति शासन लगने के बाद भी शिवसेना पूरे जी-जान से सरकार बनाने की कवायद में लगी हुई है। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंची शिवेसना की याचिका पर आज सुनवाई होनी है। पार्टी ने कोर्ट में बहुमत साबित करने के लिए गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी की ओर से और वक्त न दिए जाने के खिलाफ याचिका दाखिल की है। पार्टी ने गवर्नर से सरकार गठन के लिए तीन दिनों की मांग की थी, जिसे इनकार कर


हालांकि, पार्टी को अभी भी कांग्रेस और नेशनल कांग्रेस पार्टी से समर्थन पत्र मिलने का इंतजार है। News18 ने पार्टी के वकील सुनील फर्नांडेज़ के हवाले से बताया है कि पार्टी कोर्ट में अपनी याचिका मेंशन नहीं करेगी। कोर्ट ने पार्टी से सुबह साढ़े 10 बजे रिट पेटीशन मेंशन करने को कहा था लेकिन पार्टी ने पेटीशन मेंशन नहीं किया है।


शिवसेना का विचार है कि वो कांग्रेस-एनसीपी से समर्थन पत्र आने तक का इंतजार करेगी। वहीं खबर है कि एनसीपी उसी फॉर्मूले पर शिवसेना को समर्थन देने को तैयार है, जिस शर्त पर शिवसेना बीजेपी के साथ जाने को तैयार थी। News18 की खबर के मुताबिक, एनसीपी ने शिवसेना से 50-50 फॉर्मूले पर सरकार बनाने की शर्त रखी है। यानी ढाई सालों के लिए शिवसेना का मुख्यमंत्री और ढाई सालों के लिए कांग्रेस-एनसीपी का मुख्यमंत्री होगा।


शिवसेना का बीजेपी पर हमला


शिवसेना ने अपने स्टैंड के बचाव में बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा- हम जो कर रहे हैं, उन्हें उसकी आलोचना करने दीजिए। जब वो महबूबा मुफ्ती और नीतीश कुमार के साथ गए थे, तब क्या हुआ था? हमने भगवान नीलकंठ की तरह विषपान किया है। अगर उन्होंने अपनी बात रखी होती तो आज हमने यह कदम नहीं उठाया होता। उन्हें हमारा हक देने के बजाया विपक्ष में बैठना मंजूर है।


पार्टी ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में बीजेपी पर वार करते हुए लिखा है कि बीजेपी दूसरी पार्टियों को महाराष्ट्र में सरकार बनाते हुए संघर्ष करते देखकर मजा ले रही है। उसने लिखा कि जो लोग राजनीति में सबसे ज्यादा नैतिकता की बात करते हैं, वही सबसे ज्यादा अनैतिक हैं।


छह महीनों के लिए राष्ट्रपति शासन


बता दें कि महाराष्ट्र में अगले छह महीनों के लिए राष्ट्रपति शासन लागू हो गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार शाम को राज्य के गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी की ओर से भेजे गए सिफारिश को मंजूरी दे दी। अब राज्य में अगले छह महीनों तक यही स्थिति रहेगी। अगर इस दौरान कोई भी पार्टी बहुमत साबित करने में कामयाब हो जाती है तो उसे सरकार बनाने का मौका मिलेगा।


गवर्नर ने अपने रेकेमेंडेशन में कहा है कि राज्य में कोई भी पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है, ऐसे में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना ही एक विकल्प है। हालांकि, गवर्नर ने एनसीपी को मंगलवार की शाम साढ़े आठ बजे तक का वक्त दिया था लेकिन इसके बावजूद शाम छह बजे तक राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया।


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