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Netaji Subhash Chandra Bose Death: 75 साल पुराने रहस्य में अब उभरा रशियन एंगल

ताइपेयी में हुए विमान दुर्घटना में नेताजी की मौत की थियरी और उससे जुड़े तमाम रहस्यों के 75 साल बाद अभी तक इस दुर्घटना पर तमाम एंगल सामने आ रहे हैं
अपडेटेड Jan 24, 2021 पर 10:03  |  स्रोत : Moneycontrol.com

KINGSHUK NAG


नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मृत्यू की कंट्रोवर्सी में एक नया एंगल उभर कर आया है। जिसमें कहा जा रहा है कि रशियन डिक्टेटर जोसेफ स्टालिन ने नेताजी को साइबेरिया में बंदी बना कर रखा हो सकता है। ताइपेयी में हुए विमान दुर्घटना में नेताजी की मौत की थियरी और उससे जुड़े तमाम रहस्यों के 75 साल बाद अभी तक इस दुर्घटना पर तमाम एंगल सामने आ रहे हैं। यहां तक कि नेताजी की रहस्यमयी मौत की जांच करने के लिए बनाई गई जस्टिस एमके मुखर्जी की अध्यक्षता में बनाई गई एक सदस्यीय समिति ने भी 2005 में दिये गये अपने रिपोर्ट में कहा है कि नेताजी की मौत तथाकथित हवाई दुर्घटना में नहीं हुई। हालांकि यह समिति नेताजी के मौत के रहस्यों पर से पर्दा उठाने में असफल रही।


उसके बाद नेताजी के पौत्र सूर्य कुमार बोस और प्रपौत्री माधुरी बोस ने भी मुखर्जी कमीशन की रिपोर्ट पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि नेताजी की मौत उस विमान दुर्घटना में ही हुई थी। पिछले साल आई हुई बंगाली फिल्म गुमनामी बाबा पर भी इस मुद्दे का ही चित्रण किया गया था। गुमनामी बाबा के बारे में कहा जाता था कि वे एक संत थे जो कि नाम छिपाकर 1960 से 1987 के बीच अयोध्या में रहे। गुमनामी बाबा पूरी तरह गुमनामी की जिंदगी में रहे हालांकि उनके कुछ ऐसे शिष्य हैं जिनका यह विश्वास है कि वे सुभाषचंद्र बोस ही थे जो एकांतवास की जिंदगी जी रहे थे।


नेताजी के रूस में होने की आशंका को इस बात से भी बल मिलता है जब साल 2016 में इकबाल मल्होत्रा द्वारा बनाई गई डॉक्यूमेंट्री में Kolesnikov ने कहा था उन्होंने GRU archives (जीआरयू लेखागार) में एक दस्तावेज देखा था जिसमें ये दर्ज था कि स्टालिन अपने सहयोगी से मंत्रणा कर रहे थे कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ क्या किया जाना चाहिए। लेकिन भारत की सरकार ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया।


नेताजी के बारे में कोई पुष्ट जानकारी भले ही न उपलब्ध रही हो लेकिन उनके बारे में मौजूद डिक्लासीफाइड फाइलों के अनुसार भारत के वाइसरॉय की सलाह पर नेताजी के बारे में नीति निर्धारण के लिए तब के ब्रिटीश प्रधानमंत्री ने 25 अक्टूबर 1945 को मीटिंग बुलाई थी जिसमें यह तय हुआ था कि सुभाष चंद्र बोस को वहीं रहने दिया जाये जहां इस समय वे हों।


हालांकि ये अटकले भी लगाई जाती है कि स्टालिन ने नेताजी को उस समय तक इसलिए जिंदा रखा हो ताकि वह नेहरू और ब्रिटेन का एजेंट माने जाने वाले अन्य नेताओं के खिलाफ नेताजी और उनकी सेना को इस्तेमाल कर सके। लेकिन सन 1953 में स्टालिन की मौत हो गई और इसके बाद ऐसी अफवाहें हैं कि सोवियत यूनियन के नये लीडर्स ने नेहरू से समझौता कर लिया हो और नेताजी को साइबेरिया भेज दिया।


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