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केंद्र से केजरीवाल सरकार की गुहार, सैलरी देने के लिए नहीं है पैसे, 5000 करोड़ की मांगी मदद

कोरोना वायरस के चलते दिल्ली में केजरीवाल सरकार आर्थिक संकट से जूझ रही है
अपडेटेड Jun 01, 2020 पर 12:33  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कोरोना वायरस से पूरी दुनिया में तबाही मची हुई है। इस चीनी वायरस से आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। इस बीच दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार के पास कर्मचारियों को सैलरी देने तक के लिए पैसे नहीं है। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार से 5,000 करोड़ रुपये की तत्काल मदद मांगी है।


दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस समय दिल्ली सरकार के सामने सबसे बड़ा संकट है कि अपने कर्मचारियों की सैलरी कैसे दी जाए। मैंने केंद्र सरकार से तुरंत राहत के तौर पर 5,000 करोड़ रुपये की मांग की है, मैंने केंद्रीय वित्त मंत्री जी को चिट्ठी लिखी है।


सिसोदिया ने आगे कहा कि फाइनेंस मिनिस्टर ने आपदा राहत कोष से जो पैसा राज्यों को दिया है। वो पैसा दिल्ली सरकार को नहीं मिला है, इस वजह से दिल्ली में काफी आर्थिक संकट है। दिल्ली सरकार के पास कोई टैक्स नहीं आ रहे हैं, केंद्र सरकार से वैसे भी दिल्ली सरकार को कोई सहायता नहीं मिलती है।


उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार को केवल सैलरी देने और ऑफिस के खर्च को उठाने के लिए 3,500 करोड़ रुपये हर महीने जरूरत है। जबकि पिछले दो महीने में टैक्स से 500-500 करोड़ रुपये इकट्ठा हुए हैं, बाकी अन्य जगहों से मिलाकर दिल्ली सरकार के पास कुल 1,735 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। जबकि अभी तक 7,00 करोड़ रुपये का राजस्व आना था। केंद्र से तुरंत राहत के तौर पर कर्मचारियों की सैलरी और जरूरी कामकाज के लिए 5000 करोड़ की मांग की है। ताकि हमलोग कोरोना संकट में काम कर रहे टीचरों, डॉक्टरों, सुरक्षा कर्मियों और अन्य लोगों को वेतन दे सकें।


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