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राज्य सरकारें CAA को लागू करने के लिए मना नहीं कर सकती: कपिल सिब्बल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील कपिल सिब्बल ने कहा है कि राज्य CAA का विरोध कर सकते हैं, लेकिन लागू करने के लिए इनकार नहीं कर सकते । यह असंवैधानिक है।
अपडेटेड Jan 20, 2020 पर 08:59  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कांग्रेस भले ही नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act - CAA) का विरोध कर रही हो, लेकिन उनके पार्टी के नेता ने साफ तौर कहा है कि CAA को संसद से पास किया गया है। इसे राज्य सरकारें लागू करने से मना नहीं कर सकती।


दरअसल केरल, मध्य प्रदेश, पंजाब पश्चिम बंगाल, राजस्थान जैसे राज्य CAA समेत NRC, NPR का विरोध कर रहे हैं। केरल और पंजाब तो इसके विरोध में प्रस्ताव भी पास कर चुके हैं। कांग्रेस इसके विरोध के लिए कई पार्टियों को एकजुट कर रही है। साथ ही कांग्रेस शासित राज्यों ने इसे लागू नहीं करने का फरमान भी सुना दिया है। इस पर पूर्व कानून मंत्री, कांग्रेस के सीनियर लीडर और सुप्रीम कोर्ट के वकील कपिल सिब्बल ने साफ शब्दों में कहा है कि CAA को संसद ने पास किया है। राज्य इसे लागू करने के लिए इनकार नहीं कर सकते। इसे लागू नहीं करना असंवैधानिक है। यानी लागू नहीं करना संविधान के खिलाफ है।  हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि आप इसका विरोध कर सकते हैं। विधान सभा में विरोध के रूप में पारित करा सकते हैं। जिससे केंद्र सरकार को बिल वापस लेने की मांग कर सकते हैं। लेकिन इसे लागू करने के लिए इनकार नहीं कर सकते। मगर संवैधानिक रूप से यह नहीं कह सकते कि राज्य इसे लागू नहीं करेंगे। ऐसा करने से ज्यादा समस्याएं पैदा होंगी।


ये बातें कपिल सिब्बल ने केरल साहित्य उत्सव के दौरान तीसरे दिन कही हैं। सिब्बल ने कहा कि राज्यों का कहना है कि वे राज्य के अधिकारियों को भारत संघ के साथ सहयोग नहीं करने देंगे। आखिर वे ऐसा कैसा करेंगे? उन्होंने कहा, NRC, NPR पर आधारित है और NPR को स्थानीय रजिस्ट्रार लागू करेंगे। अब गणना जिस समुदाय में होनी है वहां से स्थानीय रजिस्ट्रार नियुक्त किए जाने हैं और वे राज्य स्तर के अधिकारी होंगे।


सिब्बल ने आगे कहा कि व्यावहारिक तौर पर ऐसा कैसे संभव है, यह उन्हें नहीं पता लेकिन संवैधानिक रूप से किसी राज्य सरकार द्वारा यह कहना बहुत कठिन है कि वह संसद द्वारा पारित कानून लागू नहीं करेगी।


वहीं इस पूरे मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि CAA की संवैधानिक स्थिति संदेहास्पद है। अगर सुप्रीम कोर्ट ने हस्ताक्षेप नहीं किया तो वो कानून की किताब में कायम रहेगा और अगर कुछ कानून की किताब में है तो उसे सभी को मानना होगा। खुर्शीद ने अपनी बात जारी रखते हुए आगे कहा कि CAA पर राज्य सरकारों की अलग-अलग राय है। उन्हें अभी सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई घोषणा का इंतजार करना होगा।


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