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एक देश, एक चुनाव तभी संभव है, जब संविधान संशोधन हो : पूर्व चुनाव आयुक्त

प्रकाशित Tue, 18, 2019 पर 17:08  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पूर्व मुख्य निर्वाचन युक्त टी. एस. कृष्णमूर्ति ने कहा कि संविधान में संशोधन किए बगैर एक देश एक चुनाव संभव नहीं है। हालांकि इसे उन्होंने ने एक अच्छी पहल बताई है।


देश के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त टी एस कृष्णमूर्ति ने मंगलवार को कहा कि एक देश, एक चुनाव’ का विचार बेहतर है। लेकिन विधायिकाओं का कार्यकाल निर्धारित करने के लिए संविधान में संशोधन जरूरी है। तभी इसे अमल में लाया जा सकता है ।


दरअसल, पीएम मोदी ने ने उन सभी राजनीतिक दलों के प्रमुखों को बुधवार को एक बैठक में हिस्सा लेने के लिए न्योता दिया है जिनका लोकसभा या राज्यसभा में एक भी सदस्य है। इस बैठक में एक देश, एक चुनाव  के अलावा कुछ और खास मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।  ।


साल 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त रहे कृष्णमूर्ति ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने के लिए चुनाव ड्यूटी के लिए बड़ी तादाद में अर्द्धसैनिक बलों की जरूरत पड़ेगी। साथ ही बहुत सारे प्रशासनिक इंतजाम करने की जरूरत पड़ेगी। लेकिन यह सब कुछ संभव है ।


उन्होंने कहा कि इससे देश को फायदा होगा। लेकिन इसको लागू करने में सबसे बड़ी रुकावट अविश्वास प्रस्ताव और संबंधित मुद्दों से जुड़े संवैधानिक प्रावधान हैं।


कृष्णमूर्ति ने आगे कहा कि, ‘इसके लिए एकमात्र रास्ता (संविधान) संशोधन है, जिसके तहत विश्वास प्रस्ताव तभी प्रभावी होगा जब कोई और व्यक्ति नेता चुना गया हो, नहीं तो पिछली सरकार चलती रहेगी । जबतक आप सदन के लिए कार्यकाल निर्धारित नहीं करेंगे, यह संभव नहीं है।


कृष्णमूर्ति ने कहा, संक्रमणकालीन प्रावधानों की भी जरूरत पड़ सकती है क्योंकि कुछ सदनों के ढाई वर्ष (के कार्यकाल) बचे होंगे तो कुछ के साढ़े चार वर्ष के बचे होंगे।


उन्होंने कहा कि चुनाव की साझा तारीख के लिए सदनों के कार्यकाल को विस्तार देने के लिए अलग से प्रावधान की आवश्यकता हो सकती है।


हालांकि पूर्व निर्वाचन आयुक्त ने ये भी कहा कि यह अनुमान लगाना बड़ा कठिन है कि इस मसले पर सभी राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति बनेगी या नहीं ।