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Jammu and kashmir: PM मोदी की अध्यक्षता में 24 जून को घाटी के नेताओं के साथ होगी सर्वदलीय बैठक

5 अगस्त, 2019 के बाद से ये जम्मू और कश्मीर के राजनीतिक दलों और केंद्र के बीच पहली बैठक होने जा रही है
अपडेटेड Jun 19, 2021 पर 13:28  |  स्रोत : Moneycontrol.com

जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में चुनाव और उसके राज्य का दर्जा वापस मिलने की अटकलों के बीच, केंद्र कथित तौर पर केंद्र शासित प्रदेश के नेताओं के साथ 24 जून को एक सर्वदलीय बैठक कर सकता है। सभी संभावनाओं में बैठक दिल्ली में आयोजित की जाएगी और इसे 5 अगस्त, 2019 के बाद से ये घाटी के राजनीतिक दलों और केंद्र के बीच पहली बैठक होने जा रही है। इस दिन राज्य को विभाजित कर, एक केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया और उसका विशेष दर्जा वापस ले लिया।


भले ही प्रधान मंत्री कार्यालय से इस पर कोई जानकारी नहीं दी गई, लेकिन पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने News18 से पुष्टि की कि उन्हें बैठक के बारे में केंद्र से एक अनौपचारिक सूचना मिली है। एक नेता ने कहा, "औपचारिक आमंत्रण का इंतजार है।"


बैठक के एजेंडे के बारे में पूछे जाने पर, नई दिल्ली में एक सूत्र ने चुटकी लेते हुए कहा, "राजनेता राजनीति पर चर्चा करेंगे।"


यदि ऐसा होता है, तो बैठक UT में चुनाव और परिसीमन अभ्यास के बारे में चल रही अटकलों को लेकर होगी। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले परिसीमन आयोग को जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या 107 से बढ़ाकर 114 करने का काम सौंपा गया है। ऐसी भी खबरें हैं कि परिसीमन अभ्यास के बाद जम्मू-कश्मीर में शक्ति संतुलन बदल सकता है।


आयोग द्वारा अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद चुनाव आयोग चुनावों की घोषणा करेगा। चुनावों का मतलब राज्य से केंद्र शासित प्रदेश के लिए राज्य की वापसी होगा, जो साल के अंत तक हो सकता है।


गुप्कर एलायंस ने संकेत दिया है कि अगर केंद्र बातचीत के लिए उनसे संपर्क करता है, तो वे जवाब देंगे। NC नेता फारूक अब्दुल्ला ने 9 जून को घाटी के अधिकांश बड़े दलों के गठबंधन की बैठक के बाद मीडिया से कहा था, "केंद्र के साथ बातचीत के दरवाजे बंद नहीं हुए हैं।"


कुछ घंटे पहले ही गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के DGP, DG CRPF, और रॉ और इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख और NSA अजीत डोभाल के साथ एक सुरक्षा समीक्षा बैठक की थी, जहां उन्होंने विकास और आंतकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पर चर्चा की।


वहीं पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में चुनाव के लिए केंद्र शासित प्रदेश से हटाई गई अर्धसैनिक कंपनियां अब वापस घाटी में चली गई हैं। अर्धसैनिक अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा तैनाती के लिहाज से वे जम्मू-कश्मीर में चुनाव के लिए तैयार हैं।


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