Moneycontrol » समाचार » राजनीति

माल्या के बयान पर सियासी बवाल जारी

प्रकाशित Fri, 14, 2018 पर 08:00  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

शराब कारोबारी और बैंकों के बकाएदार विजय माल्या के भारत छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात वाले दावे पर सियासी बवाल थम नहीं रहा है। कल वित्त मंत्री जेटली ने सफाई दी लेकिन आज सरकार और विपक्ष में टकराव बढ़ गया। आज कांग्रेस ने ज्यादा आक्रामक तेवर के साथ सरकार पर हमला किया तो बीजेपी ने उल्टे कांग्रेस और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पर उंगली उठा दी। लेकिन बीजेपी के लिए परेशानी की बात ये है कि उनकी पार्टी के सांसद सुब्रमणियन स्वामी भी अरुण जेटली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।


इस पर राहुल गांधी ने कहा कि माल्या ने लंदन में बेहद गंभीर आरोप लगाए। प्रधानमंत्री को फौरन इस मामले की स्वतंत्र जांच करानी चाहिए। जब तक इस मामले की जांच चलती है, तब तक अरुण जेटली को वित्त मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए। राहुल गांधी ने आगे कहा कि अरुण जेटली और माल्या की सांठ-गांठ सामने आ चुकी है। माल्या के लंदन भागने से पहले कॉरीडोर में दोनों लगभग 20 मिनट साथ थे। जेटली ने यह बात सीबीआई और ईडी से 2 साल तक छुपाई। माल्या को जानबूझकर बचाया गया जो देश के साथ विश्वासघात है। साफ है कि दोनों के बीच कोई न कोई डील हुई है। राहुल ने कहा कि जेटली देश को सच बताएं और इस्तीफा दें। वहीं कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया ने कहा है कि उन्होंने खुद जेटली को माल्या से मिलते देखा।


वहीं कांग्रेस पर पलटवार करने में बीडजेपी ने भी जरा भी देरी नहीं की। बाजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए राहुल गांधी और मनमोहन सिंह पर ही विजय माल्या और किंगफिशर एयरलाइंस की मदद करने का आरोप लगाया। इधर बीजेपी सांसद सुब्रमणियन स्वामी ने भी जेटली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कहा मुद्दा ये नहीं है कि जेटली से माल्या मिले थे या नहीं असल सवाल है कि आखिर एयरपोर्ट से माल्या लंदन कैसे गए। पीएम को इसकी जांच करानी चाहिए।


अब आपको बताते हैं कि ये पूरा मामला कैसे शुरू हुआ। दरअसल पहले लंदन में माल्या ने सनसनीखेज बयान दिया और उसके बाद जब वित्त मंत्री ने माल्या की बातों को झूठ का पुलिंदा करार दिया तो माल्या कुछ देर में अपनी बात से ही मुकर गए और कहने लगे कि वो मिले थे लेकिन मुलाकात कोई औपचारिक नहीं थी। बैंकों के बकाएदार शराब कारोबारी विजय माल्या ने गलतबयानी की है। कल लंदन में विजय माल्या ने एक शिगुफा छोड़ा कि वो लंदन आने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिले थे। लेकिन जैसे ही इस पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपना जवाब दिया और कहा कि उन्होंने कभी माल्या को मुलाकात के लिए वक्त नहीं दिया तो थोड़ी देर बाद ही विजय माल्या भी अपनी बात से पलट गए। माल्या ने कहा कि  जेटली से उनकी कोई औपचारिक मुलाकात नहीं हुई थी। साफ है विजय माल्या मुद्दे को भटकाने के लिए इधर-उधर की बातें कर रहे हैं।


इस बीच लंदन की वेस्टमिंस्टर्स मजिस्ट्रेट कोर्ट में पिछले 18 महीनों से चल रही विजय माल्या के प्रत्यर्पण की सुनवाई पूरी हो गई है। अदालत अब इस पर अपना फैसला 10 दिसंबर को सुनाएगी लेकिन शराब कारोबारी और बैंकों के करीब 9 हजार करोड़ रुपये के बकाएदार विजय माल्या ने आज एक नया शिगुफा छोड़कर सनसनी मचा दी। उन्होंने दावा किया कि भारत छोड़ने से पहले वो 2016 में वित्त मंत्री जेटली से मिले थे। लेकिन इसमें कर्ज के सेटलमेंट को लेकर उन्होंने जेटली से बात की थी।  मीडिया में जैसे ही ये बयान आया हंगामा मच गया और फिर कुछ देर बाद उन्होंने इस पर सफाई दी और कहा कि उनकी मुलाकात औपचारिक नहीं थी।