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आवाज़ अड्डाः संघ परिवार में प्रणव मुखर्जी, 2019 चुनाव में दिखेगा असर!

प्रकाशित Fri, 08, 2018 पर 20:39  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी आरएसएस मुख्यालय में भाषण देकर चले आए लेकिन इस पूरी घटना का कोई ठोस निष्कर्ष निकाल पाना मुश्किल है। कांग्रेस कह रही है कि प्रणव दा ने आरएसएस को आईना दिखा दिया तो संघ के लोग ये कह रहे हैं कि संघ प्रमुख और पूर्व राष्ट्रपति के भाषण एक दूसरे के पूरक बनकर सामने आए। भारत के इतिहास और संस्कृति से लेकर संविधान तक की चर्चा करते हुए दोनों महानुभावों ने राष्ट्रवाद और विविधता में एकता का ऐसा खाका खींचा, जिसपर किसी को आपत्ति नहीं हो सकती। लेकिन कही-अनकही के बीच इस बात की पूरी गुंजाइश है कि लोग अपने-अपने हिसाब से इस घटना की व्याख्या करें।


पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के आने से इस बार संघ शिक्षा वर्ग खास बन गया। मगर क्या वहां प्रणव मुखर्जी ने ऐसा कुछ किया या कहा - जिसको खास कहा जा सके - लंबे समय तक इस प्रश्न के तरह-तरह के जवाब मिलेंगे। वैसे पूर्व राष्ट्रपति ने संघ के संस्थापक डॉ हेडगेवार को श्रदांजलि देते हुए उन्हें भारत मां का महान सपूत बताया और राष्ट्रवादी संस्था में अपने संबोधन के दौरान अपने तरीके से राष्ट्रवाद की व्याख्या की।


यही नहीं प्रणव मुखर्जी ने पासिंग आउट सेरेमनी में आरएसएस कैडर को ये भी बताया कि सेकुलरिज्म हमारे लिए क्या है और क्यों भारत एक भाषा या एक धर्म का देश नहीं हो सकता।
 
अब आरएसएस पर सांप्रदायिक संगठन मानने वाले चाहें तो अपने तरीके से प्रणव मुखर्जी की बातों की व्याख्या कर सकते हैं, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति के ठीक पहले स्वागत भाषण में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी ऐसी ही बातें कहीं और भारत की विविधता में एकता और सबके समान हक को बड़ी शिद्दत से स्वीकार किया।


वैसे समारोह भले सामान्य तरीके से निकला, लेकिन इसके कुछ घंटों के भीतर आरएसएस के रंग में रंगी हुई प्रणव मुखर्जी की एक फर्जी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। और इसी के साथ पहले से प्रणव को चेता रहीं उनकी बेटी और कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने फिर ट्वीट किया कि उन्हें इसी बात का डर था। कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता शुरू से प्रणव मुखर्जी के आरएसएस मुख्यालय जाने का विरोध कर रहे थे। लेकिन अब पार्टी के सुर बदल गए हैं और कांग्रेस कह रही है कि प्रणव मुखर्जी ने आरएसएस को आईना दिखाया है।


क्या वाकई प्रणव मुखर्जी के भाषण को आईना दिखाना कहा जा सकता है? वैसे इतना तो साफ है कि प्रणव के इस दौरे से आरएसएस कई दिनों तक चर्चा के केंद्र में रहा और उसके मंच पर देश भर की टकटकी लगी रही। तो क्या माना जाए तो प्रणव मुखर्जी को बुलाने से आरएसएस को बड़ा फायदा हुआ है? और सबसे बड़ा सवाल कि आखिर प्रणव मुखर्जी ने किस-किस को और क्या-क्या संदेश दिए?