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Punjab Congress Crisis: कैसे शुरू हुई पार्टी में अंदरूनी कलह, जो बनी आज अमरिंदर सिंह के इस्तीफे की वजह

कांग्रेस 2017 में पंजाब में भारी बहुमत के साथ सत्ता में लौटी, लेकिन जल्द ही राज्य इकाई में अंदरूनी कलह शुरू हो गई
अपडेटेड Sep 19, 2021 पर 14:52  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पंजाब (Punjab) के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) ने शनिवार को अपने प्रतिद्वंद्वी नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Siddhu) के साथ महीनों से चली आ रही राजनीतिक खींचतान के बीच अपना इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस 2017 में पंजाब में भारी बहुमत के साथ सत्ता में लौटी, लेकिन जल्द ही राज्य इकाई में अंदरूनी कलह शुरू हो गई थी। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की तरफ से कोटकपूरा फायरिंग मामले (Kotkapura firing case) में एक SIT की सौंपी गई रिपोर्ट को खारिज करने के बाद, विद्रोह खुलकर सामने आ गया।


हाई कोर्ट का ये फैसला सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के लिए एक बड़ा झटका सबित हुआ। इतना ही नहीं तत्कालीन राज्य पार्टी प्रमुख सुनील जाखड़ और कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर रंधावा ने तो इस मुद्दे पर अपने इस्तीफे तक की पेशकश कर दी थी।


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दरअसल फरीदकोट जिले के बरगाड़ी में श्री गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ धरना दे रहे लोगों पर 14 अक्टूबर, 2015 को पुलिस ने फायरिंग कर दी थी। इसमें 25 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे। पुलिस ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि प्रदर्शनकारियों ने उन पर हमला किया, जिसमें कई पुलिस कर्मचारी घायल हुए थे, लेकिन जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की सिफारिशों के बाद गुरदीप सिंह पंढेर, हेड कांस्टेबल रछपाल सिंह, पूर्व विधायक मनतार सिंह बराड़ और दूसरे अधिकारियों के खिलाफ SIT ने मामला दर्ज किया था।


कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सत्ता में आते ही जस्टिस रणजीत सिंह की अगुवाई में जांच आयोग गठित किया, जिसने SIT की सिफारिश की थी।


नवजोत सिंह सिद्धू, जो पहले से ही कैप्टन के खिलाफ मुखर थे, उन्हें इसी के चलते पार्टी के भीतर और ज्यादा विधायकों का समर्थन मिला, जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पूरे झगड़े की जांच के लिए एक समिति गठित की। समिति की अध्यक्षता राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे कर रहे थे।


समिति ने इस मुद्दे पर एक रिपोर्ट पेश की और सिंह को पद पर बनाए रखने की सिफारिश की, लेकिन सिद्धू को भी राज्य इकाई में एक भूमिका देने और पंजाब में पार्टी स्ट्रक्चर को दोबारा बनाने की बात भी कही।


इसी के बाद जुलाई 2021 में, कांग्रेस ने सिद्धू को पंजाब इकाई का प्रमुख नियुक्त किया, जबकि कैप्टन ने उन्हें ये पद दिए जाने का लगातार विरोध किया। संगत सिंह गिलजियान, सुखविंदर सिंह डैनी, पवन गोयल और कुलजीत सिंह नागरा को कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया, जिससे संगठनात्मक ढांचे में अहम सुधार का रास्ता खुला।

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मगर ये सब बदलाव भी पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी को दूर करने में विफल रहीं, क्योंकि सिद्धू अलग-अलग मुद्दों पर मुख्यमंत्री को निशाना बनाते रहे। पार्टी में दरार बढ़ती जा रही थी, क्योंकि महीनों से चले आ रहे इस विवाद में, सिंह खुद को अपमानित महसूस कर रहे थे, जैसा उन्होंने भी मीडिया के सामने कहा।


वह पिछले दो महीनों में कांग्रेस हाईकमान की तरफ से विधायकों को दो बार बुलाने और चंडीगढ़ में अचानक कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक बुलाने से नाखुश थे।


कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शनिवार को राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने के बाद मीडिया से कहा, "पिछले दो महीनों में कांग्रेस नेतृत्व द्वारा मुझे तीन बार अपमानित किया गया। उन्होंने दो बार विधायकों को दिल्ली बुलाया और अब चंडीगढ़ में CLP बुलाई।" उन्होंने आगे कहा, "मैंने आज सुबह कांग्रेस अध्यक्ष से बात की, उनसे कहा कि मैं आज इस्तीफा दे दूंगा।"


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