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राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला, कहा- GDP का 10 फीसदी पैकेज 1 फीसदी ही मिला

राहुल गांधी ने कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां वायरस तेजी से बढ़ रहा है और हम लॉकडाउन को हटा रहे हैं
अपडेटेड May 27, 2020 पर 09:06  |  स्रोत : Moneycontrol.com

देश में कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन घोषित किया गया है। एक साथ लॉकडाउन न करके बल्कि कई चरणों में लॉकडाउन घोषित किया गया है। इस पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि लॉकडाउन पूरी तरह से बेअसर हो चुका है। उन्होंने पीएम मोदी से पूछा है कि लॉकडाउन फेल होने के बाद कोरोना संकट से निपटने के लिए पीएम मोदी की क्या रणनीति है?


वीडियो कॉऩ्फ्रेन्सिंग के जरिए पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि हिंदुस्तातन पहला ऐसा देश है जो बीमारी के बढ़ते वक्त  लॉकडाउन खत्मा कर रहा है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के 4 स्टे ज फेल हो चुके हैं, ऐसे में मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि आगे के लिए उसकी क्याह रणनीति है। मजदूरों के लिए क्याै व्यहवस्थां है, MSMEs को कैसे खड़ा करेंगे? सरकार कहती है कि GDP का 10 फीसदी पैकेज के रूप में दिया है मगर असल में 1 फीसदी ही मिला है। मजदूरों से मुलाकात पर राहुल गांधी ने कहा कि जब मैं उनसे मिला तो कुछ ने कहा कि हमारा भरोसा टूट गया। राहुल ने कहा कि मुझे किसी के मुंह से यह सुनना पसंद नहीं, चाहे अमीर हो या गरीब। सरकार अभी भी उनकी मदद कर सकती है।


केंद्र सरकार से राज्य सरकारों के लिए मदद की मांग करते हुए गांधी ने कहा, कुछ राज्यों में हमारी सरकार है, हम किसानों, मजदूरों को सीधे नकद सहायता दे रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। केंद्र सरकार के पर्याप्त सहयोग के बिना हमारे राज्यों के लिए काम करना कठिन होता जा रहा है।
राहुल ने कहा कि पीएम मोदी ने मीडिया में था कि लॉकडाउन का मकसद है कि हम 21 दिन में कोरोना को हरा देंगे। चौथा लॉकडाउन खत्म  होने को आ गया मगर बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। कांग्रेस सांसद ने कहा कि राज्योंह के पीछे अगर केंद्र सरकार खड़ी नहीं होगी तो वे कोरोना से नहीं लड़ पाएंगे।


एक सवाल के जवाब में राहुल ने कहा, एक राष्ट्रीय नेता के रूप में यह कहते हुए मुझे दुख हो रहा है। लेकिन कहना चाहता हूं कि अगर मदद नहीं मिली तो MSMEs दिवालिया हो जाएंगे, लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इसलिए हम इस बात पर जोर दे रहे हैं कि MSMEs और गरीबों को आर्थिक सहायता की आवश्यकता है।


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