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दिल्ली में बदला चुनावी मौसम, लोकल मुद्दे हावी या अब CAA पर पड़ेंगे वोट!

मौसम इस कदर बदला है कि एक वक्त लग रहा था कि चुनाव में लोकल मुद्दे हावी रहेंगे।
अपडेटेड Jan 29, 2020 पर 12:11  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दिल्ली में ठंडे मौसम के साथ पॉलिटिकल पारा चढ़ता जा रहा है। मौसम इस कदर बदला है कि एक वक्त लग रहा था कि चुनाव में लोकल मुद्दे हावी रहेंगे। लेकिन पूरी चर्चा नागरिकता कानून और शाहीन बाग के आस पास सिमटती जा रही है। भाषा की मर्यादा भी टूट रही है। देश के गद्दारों को गोली मारने की अनुराग ठाकुर की ललकार के बाद अब बीजेपी के सांसद प्रवेश वर्मा ने मोर्चा संभाला है। उन्होंने चुनावी गेम को खुल्लम खुल्ला हिंदू बनाम मुसलमान बना दिया। दिल्ली के लोगों को उन्होंने आगाह किया है कि शाहीन बाग को यूं ही बढ़ने दिया गया तो हिंदू बहन बेटियों की इज्जत सुरक्षित नहीं रहेगी। प्रवेश वर्मा ने वादा किया कि दिल्ली में बीजेपी की सरकार बनते ही शाहीन बाग खाली करवा देंगे।


प्रवेश वर्मा अपनी बात पर टिके हुए हैं। अपनी सफाई में उन्होंने केजरीवाल पर ध्रुवीकरण करने का आरोप भी लगा दिया। दिल्ली की आर-पार की लड़ाई में बीजेपी प्रवेश वर्मा के साथ है। वो जो भयावह तस्वीर खींच रहे हैं, दूसरे बीजेपी नेता उनकी हां में हां मिला रहे हैं।  कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने प्रवेश वर्मा के बयान पर कड़ा एतराज जताया है और कहा है कि इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
 
उधर गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों का एक वीडियो ट्वीट किया। इसमें बीजेपी के सांसद अलग-अलग सरकारी स्कूलों में कमियां निकालते दिखाए गए हैं। केजरीवाल ने भी अमित शाह को सरकारी स्कूलों की हालत पर जवाब दिया।


सवाल ये है कि क्या आखिरी राउंड में दिल्ली के चुनाव की हवा बदल गई है? प्रवेश वर्मा और उन जैसे दूसरे बीजेपी नेता हर हाल में नागरिकता कानून को दिल्ली चुनाव का मुख्य मुद्दा बनाने पर तुले हुए हैं। सवाल ये है कि क्या शाहीन बाग के रूप में बीजेपी के हाथ में नया हथियार लग गया है? और ये चुनावी नतीजे को बदलने का दम रखता है? क्या अब वोट विकास की बात पर नहीं शाहीन बाग के समर्थन और विरोध पर पड़ेगा?


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