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महाराष्ट्र में फंसा सरकार को लेकर पेंच, BJP-शिवसेना में क्या होगी सुलह

महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर BJP और शिवसेना के बीच में जोरदार रस्साकशी चल रही है।
अपडेटेड Nov 08, 2019 पर 11:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर BJP और शिवसेना के बीच में जोरदार रस्साकशी चल रही है। सेना किसी भी हालत में मुख्यमंत्री पद से कम पर मानने को तैयार नहीं है। जबकि BJP का रुख इस बारे में पहले से साफ है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ही होंगे। आज विधायकों के साथ बैठक में शिवसेना ने फिर साफ कर दिया है कि 50-50 फॉर्मूले से कम पर किसी प्रकार का समझौता नहीं हो सकता। दूसरी और BJP भी झुकने को तैयार नहीं है, याद रहे कि 9 नवंबर मौजूदा विधानसभा की आखिरी तारीख है। दोनों दल राज्यपाल से मिल चुके हैं लेकिन हुआ कुछ नहीं, अब ऐसा लगता है कि महाराष्ट्र में सरकार बनने के आसार बहुत कम हैं, क्या होगा महाराष्ट्र का भविष्य?


महाराष्ट्र में सरकार बनाने की डेडलाइन जैसे जैसे करीब आ रही है - राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 9 नवंबर तक नई सरकार बनानी है। लेकिन बीजेपी और शिवसेना में सुलह नहीं हो पाई है। बीजेपी नेता महाराष्ट्र के गवर्नर भगत सिंह कोशियारी से मिले भी तो उन्होंने सरकार बनाने की पेशकश नहीं की बल्कि कानूनी पहलुओं पर चर्चा करके लौट आए।


शिवसेना मुख्यमंत्री पद की मांग को लेकर अड़ी हुई है। इसे मानने को बीजेपी तैयार नहीं है। शिवसेना दूसरे विकल्प भी तलाश रही है। NCP-कांग्रेस के साथ उसकी बातचीत चल रही है। लेकिन NCP-कांग्रेस जल्दबाजी में नहीं दिख रहे हैं। उन्हें लगता है कि महायुति का अंत अपने आप हो जाए तो फिर वो पहल करें। और शिवसेना है कि वो बीजेपी को लगातार ललकार रही है।


दोनों पार्टनरों के बीच अविश्वास का आलम ये है कि शिवसेना ने सभी विधायकों को एक होटल में शिफ्ट कर दिया है। उसे डर है कि बीजेपी उसके विधायकों को तोड़ सकती है।


खबर ये भी थी कि बीजेपी-शिवसेना के बीच तनाव कम करने के लिए RSS हस्तक्षेप कर सकता है। लेकिन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ऐसी अटकलों पर विराम लगा दिया है। पर उन्हें अब भी बीजेपी-शिवसेना की सरकार बनने की उम्मीद है।


चुनाव नतीजों के 15 दिन बाद भी महाराष्ट्र की जनता नई सरकार का इंतजार कर रही है। लेकिन जिन्हें जनादेश मिला है वो तो एक दूसरे का हाथ थामने के बजाय आंखें तरेर रहे हैं। सवाल ये है कि क्या इस बार शिवसेना ने अड़ियल रवैया अपनाया है, उसके बाद बीजेपी के साथ उसका गठबंधन टूटना लगभग तय हो गया है। या वो बीजेपी से पीछा छुड़ाने के लिए जिद पर अड़ गई है? संजय राउत का कहना है कि अगर अमित शाह उद्धव ठाकरे से बात करते तो सब ठीक हो जाता। ऐसे में अमित शाह चुप क्यों हैं? बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व सुलह सफाई की पहल क्यों नहीं कर रहा है? या इस बार सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी बीजेपी सत्ता से बाहर रह जाएगी?


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