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हक की लड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

प्रकाशित Wed, 04, 2018 पर 16:22  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दिल्ली में आखिर किसकी सरकार है ये बात आज सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दी है। दिल्ली में उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच अधिकार की लड़ाई पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि दिल्ली में एलजी अपनी मर्जी से स्वतंत्र फैसले नहीं ले सकते वो मंत्रिपरिषद के सहयोग और सलाह पर ही काम करेंगे। चीफ जस्टिस और दो अन्य जजों ने कहा कि दिल्ली सरकार अपने हर फैसले एलजी को बताए लेकिन इस पर एलजी की सहमति जरूरी नहीं होगी।


कोर्ट ने ये भी साफ किया है कि अगर टकराव की नौबत आती है तो एलजी इसे राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं। दिल्ली को स्पेशल राज्य बताते हुए कोर्ट ने कहा है कि जमीन, पुलिस और कानून-व्यवस्था का जिम्मा दिल्ली सरकार के पास नहीं है ये तीनों केंद्र के अधीन ही रहेंगे। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने 4 अगस्त 2016 को दिए अपने फैसले में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 239-एए के तहत एलजी यानि उपराज्यपाल ही दिल्ली के मुखिया हैं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि मंत्रिमण्डल की हर सलाह को मानने के लिए एलजी बाध्य नहीं है। तबादले तथा नियुक्तियों के बारे में एलजी तथा केन्द्र सरकार को ही सभी अधिकार हासिल हैं।


दिल्ली सरकार के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। सिसोदिया ने केन्द्र सरकार और एलजी पर मनमानी के आरोप लगाए।


उधर बीजेपी नेता महेश गिरी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को केन्द्र और एलजी की जीत बताया। गिरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी एलजी को दिल्ली का बॉस मान लिया है।


वहीं दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित ने कहा कि एलजी और केजरीवाल को दिल्ली की भलाई के लिए मिलकर काम करना चाहिए।