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शरद का ट्रस्ट फैक्टर, पवार की चिंता या तुष्टिकरण की राजनीति!

NCP प्रमुख शरद पवार चाहते हैं कि अयोध्या में मस्जिद के लिए भी एक ट्रस्ट बने। और ये ट्रस्ट सरकार बनाए।
अपडेटेड Feb 23, 2020 पर 15:40  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

NCP प्रमुख शरद पवार चाहते हैं कि अयोध्या में मस्जिद के लिए भी एक ट्रस्ट बने। और ये ट्रस्ट सरकार बनाए। लेकिन जब अयोध्या विवाद सुप्रीम कोर्ट से सुलट गया है तो फिर पवार इसमें नया ट्विस्ट क्या देना चाहते हैं। मुसलमानों के तुष्टिकरण का जो आरोप बीजेपी लगाती रही है क्या पवार उसे ही साबित नहीं कर रहे हैं। और देशभर में हिंदू मुसलमान करने की जो होड़ मची है उसमें वारिस पठान ने भी अपनी एंट्री कर ली है। वारिस पठान के जहरीले बोल दोनों समुदायों के बीच नफरत पैदा करने वाले हैं।


अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। राम मंदिर ट्रस्ट में सदस्यों की नियुक्ति के साथ ही बैठकों का दौर चल रहा है। लेकिन मस्जिद को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुस्लिमों को अयोध्या के बाहर 5 एकड़ जमीन स्वीकार नहीं है। ऊपर से NCP के मुखिया शरद पवार ने मस्जिद के लिए ट्रस्ट बनाने की बात कहकर नया विवाद छेड़ दिया है।


पवार को अपनी सहयोगी पार्टियों का समर्थन मिल गया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया था। लेकिन दोनों पार्टियां मस्जिद के लिए ट्रस्ट चाहती हैं। बीजेपी ने पवार के बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है। यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पवार के ऊपर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं।


पवार के बयान को लेकर संतों में भी रोष है। तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास का कहना है कि पवार जैसे लोग आतंकवादी विचारधारा को बढ़ावा दे रहे हैं और हिंदू-मुसलमान को लड़ाना चाहते हैं। विश्व हिंदू परिषद भी पवार को इस मामले से दूर रहने कीनसीहत दे रहा है। बाबरी मस्जिद मामले में पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने भी पवार को आइना दिखा दिया है।


सवाल ये है कि पवार ने मस्जिद के लिए ट्रस्ट बनाने की बात क्यों छेड़ी? क्या ये मुस्लिमों को लुभाने की उनकी कोशिश है? या फिर वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी बाबरी मस्जिद विवाद को जिंदा रखना चाहते हैं? सवाल ये भी है कि क्या मुस्लिम समुदाय ने उनसे ट्रस्ट बनाने की कोई मांग भी की है? या फिर इसे विपक्ष की तुष्टिकरण की राजनीति के नजरिए से देखना चाहिए? इसी पर हो रही आवाज़ अड्डा में बड़ी चर्चा।


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