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CM उद्धव ठाकरे के बयान से सियासी उबाल, शिरडी अनिश्चितकालीन बंद, लेकिन खुला साईं बाब मंदिर

महाराष्ट्र के परभणी जिले के पाथरी को गांव को साईं का जन्म स्थान बताकर सीएम उद्धव ठाकरे ने विकास के लिए 100 करोड़ रुपये देने की घोषणा की।
अपडेटेड Jan 20, 2020 पर 09:06  |  स्रोत : Moneycontrol.com

महाराष्ट्र में सीएम उद्धव ठाकरे के लिए शिरडी विवाद गले की फांस बन गया है। सीएम उद्धव ठाकरे की अपील के बावजूद शिरड़ी में बंद की घोषणा की गई है। सड़कों पर सन्नाटा पसर गया है। हालांकि साईं बाबा का मंदिर खुला है। आस्था को लेकर साईं भक्त सड़कों पर उतर गए हैं। ऐसे में सवाल ये है कि क्या हर दिन शिरडी पहुंचने वाले हजारों श्रद्धालुओं को को पिसना पड़ेगा या फिर आस्था के आगे उद्धव सरकार को झुकना पड़ेगा।


दरअसल मामला कुछ यूं है कि महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने परभणी जिले के पाथरी गांव को साईं बाबा की जन्म भूमि बताया और विकास के लिए 100 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। पाथरी गांव शिरडी से करीब 275 किमी दूर है। कुछ श्रद्धालु पाथरी को साईं बाबा का जन्मस्थान मानते हैं। जबकि शिरडी के लोगों का दावा है कि उनका जन्मस्थान अज्ञात है। वैसे साईं के जन्म को लेकर साफ-साफ जानकारी किसी को नहीं है, लेकिन कहा जाता है कि वह शिरडी आकर बस गए और यहीं के होकर रह गए। इसके बाद से शिरडी की पहचान भी साईं से हो गई।


इस बंद पर स्थानीय BJP विधायक राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि उन्होंने स्थानीय लोगों द्वारा बुलाए गए बंद का समर्थन किया है। इसके साथ ही शिरडी स्थित श्री साईं बाबा संस्थान न्यास के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपक मुगलीकर ने बताया कि बंद के बावजूद मंदिर खुला रहेगा। मुगलीकर ने आगे कहा कि सीएम उद्धव ठाकरे को साईं बाबा का जन्मस्थान पाथरी होने संबंधी बयान को वापस लेना चाहिए। देश के कई साईं मंदिरों में एक पाथरी में भी है। सभी साईं भक्त इससे आहत हुए हैं, इसलिए इस विवाद को खत्म होना चाहिए। वहीं कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम अशोक चव्हाण ने भी कहा कि पाथरी में विकास का विरोध जन्मस्थान विवाद की वजह से नहीं किया जाना चाहिए।


कुल मिलाकर सीएम उद्धव ठाकरे के बयान के चलते शिरडी के लोग नाराज हो गए हैं। वहां के लोगों का कहना है कि पाथरी के विकास का कोई विरोध नहीं है, लेकिन साईं का जन्म स्थान बताना विरोध है। 


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