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फिर उछला जूता, जानिए जूतों का राजनीतिक किस्सा

प्रकाशित Thu, 18, 2019 पर 16:20  |  स्रोत : Moneycontrol.com

लोकतंत्र के इस महाकुंभ में नेताओं के बयानों की बौछार के बाद अब आम जन की तरफ से जूता कांड अपनी कहानी दोहरा रहा है। इस लोकतंत्र के पावन मंदिर में जूता कांड को कोई जगह नहीं है, लेकिन यह अनायास कभी भी बेमौसम किसी पर बरस पड़ता है।


कुछ ऐसे ही आज जब दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय पर प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव और भूपेंद्र यादव साध्वी प्रज्ञा पर प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर रहे थे। उसी दौरान एक शख्स ने नरसिम्हा राव पर जूता फेंक कर मारा। हालांकि, जूता फेंकने वाले शख्स को तुरंत पुलिस ने अरेस्ट कर लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी शख्स कानपुर निवासी शक्ति भार्गव है और वह पेशे से डॉक्टर हैं। पुलिस भार्गव को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।


जानिए कब-कब हुआ जूता कांड


अप्रैल 2009 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम पर जरनैल सिंह नाम के एक पत्रकार ने जूता फेंक दिया था। पत्रकार जरनैल सिंह ने तत्कालीन गृहमंत्री चिदंबरम से जगदीश टाइटलर को बरी करने को लेकर एक सवाल पूछा था, जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि इसकी जांच एक स्वतंत्र जांच एजेंसी कर रही है। गृहमंत्री के जवाब के बाद जरनैल सिंह को गुस्सा आ गया और उसने प्रतिक्रिया स्वरूप अपना जूता चिदंबरम पर दे मारा। बाद में जरनैल सिंह पंजाब से विधायक भी बनें।


जनवरी 2012 में देहरादून में एक चुनावी रैली के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर भी जूता फेंका गया था। हमले के जवाब तब राहुल ने कहा था अगर कुछ लोगों को लगता है कि जूता फेंकने से मुझे डराया जाएगा और मुझे भागने के लिए मजबूर किया जाएगा, तो वे गलत हैं।


2009 में अहमदाबाद में एक चुनावी रैली के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर 28 वर्षीय एक व्यक्ति ने जूता फेंका। हालांकि, जूता उन तक पहुंच नहीं पाया।


आम आदमी पार्टी के एक सदस्य ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर जूता फेंक दिया। हालांकि जूता उन तक पहुंच नहीं पाया।


मार्च 2013 में कराची में पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ पर ताजमहल लोधी नाम के एक वकील ने अपना जूता फेंका। वकील ने बाद में कहा कि उसने जूता इसलिए फेंका क्योंकि वह मुशर्रफ से पाकिस्तान में लोकतंत्र को नष्ट करने की कोशिश के लिए नफरत करता था। जूता मुशर्रफ के नाक पर लगा था। उसी साल फरवरी में एक अन्य व्यक्ति ने दोबारा ऐसी ही घटना को अंजाम दिया, जब मुशर्रफ लंदन के वाल्टहम्सो में एक सभा को संबोधित कर रहे थे।