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सरकारी कामकाज में मराठी अनिवार्य करेगी ठाकरे सरकार, 55 साल पुराने कानून में करेगी बदलाव

मराठी महाराष्ट्र की राजभाषा है यह कानून 1964 में बनाया गया था। पंरतु ये राजभाषा कानून सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहा है और राजनेताओं ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।
अपडेटेड Sep 16, 2020 पर 16:23  |  स्रोत : Moneycontrol.com

महाराष्ट्र (Maharashtra) में राज्य सरकार द्वारा प्रशासकीय कार्यों में मराठी (Marathi) भाषा का प्रयोग अनिवार्य किये जाने के लिए सर्कुलर जारी किये गये हैं फिर भी मराठी भाषा का बड़े पैमाने पर राज्य के कामकाज में उपयोग दिखाई नहीं देता है। इसकी वजह से अब राज्य की ठाकरे सरकार ने 1964 का महाराष्ट्र राजभाषा कानून अधिक सख्त करने का फैसला किया है।


महाराष्ट्र टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक पिछले 55 सालों से इस कानून में कोई सुधार नहीं किया गया है लेकिन अब राज्य का प्रशासकीय कामकाज मराठी भाषा, राज्य का पूरा कामकाज, अर्धन्यायिक निर्णय, वेबसाइट्स, महामंडलों का कामकाज मराठी में होना चाहिए इसे सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 1964 के नियम में फेरबदल करने के निर्णय लिया है।


इस निर्णय के तहत राज्य के जिस प्रशासकीय और न्यायिक क्षेत्र में 1964 का कानून लागू नहीं होता है उस क्षेत्र में ये कानून लागू करने का प्रावधान मराठी राजभाषा नियम में किया जायेगा। राजस्व विभाग की ओर से जमीन या अन्य अर्धन्यायिक अपील के रिजल्ट अंग्रेजी भाषा में दिये जाते हैं। इसके बाद ये रिजल्ट भी मराठी में ही दिये जाने के बारे में प्रावधान इस फेरबदल में किये जायेंगे।


मराठी महाराष्ट्र की राजभाषा है यह कानून 1964 में बनाया गया था। पंरतु ये राजभाषा कानून सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहा है और राजनेताओं ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। राज्य सरकार के अधीन सिडको, एमआईडीसी जैसे महामंडलों में अंग्रेजी में ही कामकाज होता है। न्यायालय से संबंधित राज्य सरकार की तरफ से प्रस्तुत किये जाने वाले प्रतिज्ञापत्र अंग्रेजी में होते हैं। इसलिए ये सभी कामकाज मराठी भाषा में ही करने का कानून बनाने का निर्णय मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thackeray) ने किया है।


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