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आवाज़ अड्डाः मध्यस्थता का मौका दोनों पक्षों ने गंवाया, क्या SC में खिंचेगा मामला!

प्रकाशित Fri, 12, 2019 पर 08:26  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

राम मंदिर विवाद के हल के लिए सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई की जो मांग लंबे समय से हो रही थी वो अब लगता है पूरी होने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन लोगों के मध्यस्थता के लिए 15 अगस्त तक का समय दिया था। लेकिन कोर्ट ने एक हिंदू पक्ष की याचिका पर आदेश दिया है कि मध्यस्थता कर रहे लोग 18 जुलाई तक स्टेटस रिपोर्ट दें। अगर मध्यस्थता पैनल को लगता है कि बातचीत से कोई हल नहीं निकल रहा है तो सुप्रीम कोर्ट 25 जुलाई से इस मामले की रोजाना सुनवाई शुरू कर देगा। सवाल ये है कि अयोध्या विवाद का हल कैसे होना चाहिए? सुप्रीम कोर्ट से या मध्यस्थता से।


अयोध्या में राम मंदिर विवाद का हल निकालने के लिए कई कोशिशें हो चुकी हैं। लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले में एक बार फिर बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। लेकिन हिंदू पक्षकारों को इसका कोई नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है। एक हिंदू पक्षकार ने सुप्रीम कोर्ट में मध्यस्थता को बंद करके दोबारा सुनवाई शुरू करने की गुहार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मध्यस्थता पैनल को 15 अगस्त तक का समय दिया था लेकिन अब उससे 18 जुलाई तक स्टेटस रिपोर्ट मांग ली है। कोर्ट ने कहा है कि अगर पैनल को लगता है कि मध्यस्थता कारगर साबित नहीं हो रही तो इस मामले की 25 जुलाई के बाद रोजाना सुनवाई होगी।


हिंदू पक्षकार और संत समाज राम मंदिर मामले की कोर्ट में रोजाना सुनवाई की मांग करते रहे हैं। वो केंद्र सरकार से राम मंदिर पर अध्यादेश लाने का दबाव भी बनाए हुए हैं। उन्हें अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर चाहिए। मुस्लिम पक्ष की दलील है कि किसी एक पक्ष की बातचीत से संतुष्ट नहीं होने पर बातचीत की प्रक्रिया रद्द नहीं होनी चाहिए। वैसे वो भी चाहते हैं कि किसी भी तरह इस मामले का हल निकले।


सवाल ये है कि क्या बातचीत से अयोध्या विवाद का हल निकल पाएगा? मध्यस्थता को लेकर संत समाज में खास उत्साह नहीं है। ऐसे में क्या ये पहले से तय नहीं हो गया है कि इस बातचीत की प्रक्रिया का हश्र क्या होगा? सवाल ये भी है कि क्या मुस्लिम पक्ष इस मामले को लंबा खींचना चाहते हैं? क्या अब सुप्रीम कोर्ट को रोजाना सुनवाई करके इस मामले पर जल्दी फैसला नहीं सुना देना चाहिए?