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नागरिकता संशोधन बिल पर लग गई मुहर, सरकार के फैसलों पर राजनीतिक एजेंडा हावी?

मई में दोबारा सत्ता संभालने के बाद से ही मोदी सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने के लिए पूरे एक्शन में है।
अपडेटेड Dec 13, 2019 पर 11:51  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जो कहा सो किया, बीजेपी का ये पुराना नारा है लेकिन मोदी सरकार ने दूसरे टर्म के पहले साल ही या यूं कहें कि 6 महीने में ही कई बड़े वादे पूरे कर दिए है, मोदी सरकार जिस तरह से काम कर रही है उससे लगता है कई और बड़े मुद्दे जल्द ही सरकार के टॉप एजेंडे में होंगे, 3 तलाक, नागरिकता कानून, आर्टिकल 370 और राम मं​दिर जैसे मुद्दे हल हो गए है और भले ही कोर्ट के जरिए लेकिन NRC भी लागू हुआ है और अब होम मिनिस्टर अमित भाई शाह ने एलान किया है कि पूरे देश में NRC लागू किया जाएगा, हालांकि इतनी जल्दबाजी में इन फैसलों के अमल में दिक्कत आ रही है और इसके लिए आलोचना भी हो रही है, पर सरकार के इरादे देखकर ऐसा लगता है कि मोदी है मुमकिन है।


मई में दोबारा सत्ता संभालने के बाद से ही मोदी सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने के लिए पूरे एक्शन में है। पिछले 7 महीने में मोदी सरकार ने अपने घोषणापत्र के तीन बड़े और विवादित वादों को पूरा कर दिया है। पहले जुलाई में ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून बनाया, फिर अगस्त में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया और अब नागरिकता संशोधन बिल को संसद से पास करा लिया। विपक्ष ने तीनों बिलों का संसद में जोरदार विरोध किया, लेकिन उसकी एक नहीं चली। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता के बीच छाती ठोक कर कह रहे हैं कि उन्होंने जो कहा वो किया है।


अब बीजेपी के घोषणापत्र में दो ऐसे विवादित मुद्दे हैं जिन पर सरकार आगे बढ़ सकती है। ये हैं यूनिफॉर्म सिविल कोड और देशभर में NRC लागू करना। यूनिफॉर्म सिविल कोड एक पेंचीदा मुद्दा है जिसमें देश के सभी धर्म और समुदाय के लोगों के लिए एक समान कानून होगा। इसके बाद अलग-अलग धर्मों के पर्सनल लॉ खत्म हो जाएंगे। शादी, तलाक, विरासत, गुजारा भत्ता जैसे मामले यूनिफॉर्म सिविल कोड के तहत ही निपटाए जाएंगे।


अमित शाह एलान कर चुके हैं कि पूरे देश में NRC लागू होगा। लेकिन असम में जिस तरह NRC और सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल को लेकर बवाल मचा हुआ है, उसके बाद सरकार शायद जल्दबाजी ना करें। लेकिन गृह मंत्री अपना इरादा जाहिर कर चुके हैं।


जनसंख्या नियंत्रण को लेकर भी देश में नई बहस छिड़ चुकी है। ये मुद्दा बीजेपी के घोषणापत्र में नहीं है, लेकिन इसको लेकर बीजेपी और संघ के लोग अचानक सक्रिय हो गए हैं। RSS प्रमुख मोहन भागवत भी जनसंख्या नियंत्रण के लिए कदम उठाए जाने की बात कह चुके हैं। लेकिन सवाल ये है कि जितने बड़े फैसले सरकार कर रही है क्या उस पर पूरा विमर्श भी हो रहा है?


अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से कश्मीर के हालात को लेकर परस्पर विरोधी खबरें आ रही हैं। नागरिकता संशोधन बिल के पास होते ही असम में बवाल मचा हुआ है। विपक्ष इन्हें विभाजन करने वाले कदम बता रहा है। सरकार का तर्क है कि विपक्ष उसके हर कदम को हिंदू मुसलमान के चश्मे से देखना बंद करे। लेकिन क्या ये बातें मुसलमानों में भी भरोसा पैदा कर रही हैं? या कोर्ट से राम मंदिर का मसला सुलझ जाने के बाद NRC और यूनिफॉर्म सिविल कोड जैसे मुद्दे उनकी जगह लेने को तैयार हैं?