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UP में भगवान परशुराम पर पॉलिटिक्स, ब्राह्मणों को लुभाने की मची होड़ !

UP में भगवान परशुराम भी पॉलिटिक्स के शिकार हो गए हैं। ब्राह्मणों को लुभाने की होड़ मची है।
अपडेटेड Aug 11, 2020 पर 08:28  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

UP में भगवान परशुराम भी पॉलिटिक्स के शिकार हो गए हैं। ब्राह्मणों को लुभाने की होड़ मची है।  SP,BSP,कांग्रेस को अब ब्राह्मणों का सहारा  नजर आ रहा है। कुछ लोगों को लगता है कि योगी राज में ब्राह्मण हाशिए पर हैं। ब्राह्मण मजबूरी में BJP का साथ देते हैं। ऐसे में ब्राह्मणों को लुभाया जा सकता है। ऐसे में विपक्ष का ब्राह्मणों पर दांव लगा रहा है।


अखिलेश यादव ने  UP के हर जिले में  परशुराम की मूर्ति लगाने का एलान किया है। उन्होंने क्रांतिकारी मंगल पांडे की मूर्ति लगाने का एलान किया है। वहीं मायावती के एलान किया है कि राज्य में परशुराम की मूर्ति लगाई जाएगी। ब्राह्मण महापुरुषों के नाम पर अस्पताल और पार्क  बनेंगे। कांग्रेस की मुहिम भी जारी है। कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद का ब्राह्मण चेतना संवाद जारी है। वे  ब्राह्मण समुदाय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात कर रहे हैं।


ब्राह्मणों को लुभाने की कोशिश क्यों?


फिलहाल सवर्णों का बड़ा वोट बैंक BJP के पास है।  BJP से मुकाबले के लिए ब्राह्मणों को साथ लाना जरूरी है। दूसरी मजबूत सवर्ण जातियों को भी अपने पाले में लाना जरूरी है। अब तक BJP ब्राह्मणों और ठाकुरों का वोट पाने में कामयाब रही है। SP, BSP,कांग्रेस BJP के वोट बैंक में सेंध लगाना चाहते हैं। सवर्णों के बड़े वोट बैंक को अपने पक्ष में करने  की  कोशिश हो रही है। बता दें कि 2007 के चुनाव में मायावती ब्राह्मणों का वोट ले चुकी हैं। मायावती फिर से सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला आजमाना चाहती हैं। वैसे SP हर साल परशुराम जयंती मनाती रही है।


BJP की बढ़ेगी मु्श्किल?


2017 के UP चुनाव में BJP को ब्राह्मणों का समर्थन मिला था। BJP 312 सीटों पर जीती थी। 58 ब्राह्मण उम्मीदवार विधायक बने। लेकिन सरकार में ब्राह्मणों का खास वर्चस्व नहीं है। मंत्रिमंडल में सिर्फ 9 ब्राह्मणों को जगह मिली है।


UP में ब्राह्मण वोट की अहमियत


UP में ब्राह्मण वोटरों की आबादी करीब 10.5 फीसदी है। संख्या के आधार पर ब्राह्मण वोटर कम हैं। लेकिन इनमें सत्ता का रूख तय करने और बिगाड़ने की ताकत है। ब्राह्मण राजनीतिक, सामाजिक ओपिनियन मेकर माने जाते हैं।




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