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जामिया की हिंसा पर वीडियो वॉर, वीडियो में उलझी जामिया हिंसा की हकीकत !

जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिविर्सिटी में हुई हिंसा पर दो महीने बाद वीडियो वॉर छिड़ गया है।
अपडेटेड Feb 18, 2020 पर 11:58  |  स्रोत : Moneycontrol.com

जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिविर्सिटी में हुई हिंसा पर दो महीने बाद वीडियो वॉर छिड़ गया है। जामिया के छात्र और दिल्ली पुलिस दोनों की तरफ से वीडियो जारी हुए हैं। पहला वीडियो जामिया कॉर्डिनेशन कमिटी की तरफ से जारी हुआ। इसमें 15 दिसंबर, 2019 को जामिया की लाइब्रेरी के अंदर का CCTV फुटेज है। वीडियो में छात्र पढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। अचानक से पुलिस लाइब्रेरी के अंदर घुसती है और छात्रों की जमकर पिटाई करती है। हालांकि जामिया यूनिवर्सिटी ने साफ कर दिया है कि ये वीडियो उन्होंने जारी नहीं किया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने दो वीडियो जारी किए। एक वीडियो में छात्र लाइब्रेरी के अंदर आ रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि जैसे छात्र लाइब्रेरी में छुपने की कोशिश कर रहे हैं। वीडियो में नकाब और रुमाल से ढके चेहरे भी हैं। छात्र लाइब्रेरी की टेबल को खिसकाकर दरवाजा बंद करते दिखाई दे रहे हैं। वहीं पुलिस के दूसरे वीडियो में छात्रों के हाथ में पत्थर हैं और वो लाइब्रेरी में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। एक के बाद एक वीडियो जारी होने के बाद जामिया पर सियासी घमासान छिड़ गया। कांग्रेस ने छात्रों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए।


दूसरी विपक्षी पार्टियों ने भी बीजेपी को अपने निशाने पर ले लिया है। बीजेपी ने जामिया में पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया था। वो अब भी दिल्ली पुलिस की पीठ थपथपा रही है। बीजेपी वीडियो में चेहरा ढंक कर बैठे छात्रों पर सवाल खड़े कर रही है। बीजेपी का मानना है कि छात्र बाहर हिंसा करके छुपने के लिए लाइब्रेरी में आए। मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का कहना है कि जामिया और JNU जैसे प्रतिष्ठत संस्थानों की गरिमा गिराने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। जामिया पर वीडियो का सिलसिला अभी भी जारी है। इस वीडियो वॉर में कौन सच्चा है और कौन झूठा, ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा। लेकिन सवाल ये है कि क्या पुलिस ने लाइब्रेरी में ना घुसने की बात कहकर पहले झूठ बोला था? या ये उसकी अपनी ज्यादती पर पर्दा डालने की कोशिश थी? सवाल ये भी है कि क्या जामिया उपद्रवी लोगों का पनाहगाह बन गया था? उन लोगों को बचाने की कोशिश कौन कर रहा था जो पुलिस पर पथराव कर रहे थे? इस मामले पर जामिया प्रशासन का रवैया भी संदेह पैदा करता है। क्या चंद छात्रों की वजह से जामिया और JNU जैसे संस्थान बदनाम हो रहे हैं? आवाज़ अड्डा में यहां इन्हीं सवालों पर हो रही है बड़ी बहस।


 


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