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फर्जी वोटिंग पर रोक लगाने के लिए आधार से लिंक हो सकता है Voter ID

चुनाव आयोग ने सरकार से मांग की है कि आधार कोर्ड को वोटर आईडी से लिंक करने के लिए कानून बना दिया जाए
अपडेटेड Aug 21, 2019 पर 16:03  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कहते हैं भारत देश चुनावों का देश है। यहां हर समय देश के किसी न किसी कोने में कोई न कोई चुनाव होते रहते हैं। लेकिन अब सरकार ने एक देश एक चुनाव की अलख भी जगा रही है। चुनाव एक साथ तो हो जाएंगे। फिर समस्या आती है। फर्जी मतदान की। पहले भी कई बार बूथ कैप्चरिंग से लेकर फर्जी मतदान तक की खबरें आ चुकी हैं। ऐसे में चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय को चिट्ठी लिखी है। जिसमें कहा गया है कि आधार कार्ड को वोटर आईडी से लिंक करने के लिए कानून बना दिया जाए। जिससे फर्जी मतदानों पर लगाम लगाई जा सके।


दरअसल इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें जनप्रतिनिधि में कानून में संसोधन की मांग की गई है। इसमें आधार कार्ड को वोटर आईडी कार्ड से जोड़ने की सिफारिश की गई है। आयोग ने कहा है कि वो नए आवेदकों और मौजूदा मतदाताओं की आधार संख्या एकत्र करना चाहता है। जिससे कि वोटर लिस्ट में दर्ज नाम की जांच-पड़ताल की जा सके।


हालांकि चुनाव आयोग ने फर्जी मतदान को रोकने के लिए साल 2015 में फर्जी वोटर आई डी को खत्म करने के लिए आधार कार्ड से लिंक करना शुरु कर दिया था। लेकिन चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पहले चुनाव आयोग 38 लाख वोटर आईडी को आधार से लिंक कर चुका था।
इस अभियान को आगे बढ़ाते हुए चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय से जनप्रतिनिधि कानून 1951 में संसोधन का प्रस्ताव किया है। इस प्रस्ताव के तहत वोटर आई डी को आधार कार्ड क 12 अंकों से जोड़ना अनिवार्य हो जाएगा। इससे फर्जी वोटर आई की पहचान करना भी आसान हो जाएगा। साथ ही आधार कार्ड से जुड़ने पर ये भी पता चल जाएगा कि कोई वोटर कितनी जगह से वोटिंग कर रहा है।


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