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राहुल की न्याय क्यों हुई फ्लॉप, जानिए कारण

प्रकाशित Fri, 24, 2019 पर 14:08  |  स्रोत : Moneycontrol.com

बड़े बजट की अधिकतर फिल्में जिसमें नामचीन हीरो होता है, लेकिन कहानी में दम नहीं होने की वजह से बॉक्स ऑफिस में फ्लॉप हो जाती है। अभी लोकसभा चुनाव की आंधी में जनता के बॉक्स ऑफिस पर कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी की न्याय योजना (फिल्म) भी फ्लॉप साबित हो गई। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या इस योजना (फिल्म) में कोई दमदार कहानी (ठोस योजना) नहीं थी या फिर कांग्रेस जनता के दिल दिमाग में भरोसा नहीं पैदा कर पाई।


शुरुआत करते हैं मोदी के पांच साल की जारी योजनाओं और राहुल गांधी की न्याय योजना का विश्लेषण


दरसअसल, सन 1971 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओं का नारा देकर सत्ता की चाभी हासिल की थी। उसी पथ पर आगे बढ़ते हुए राहुल गांधी ने न्याय योजना को पेश किया। इस योजना के तहत प्रत्येक गरीब परिवार को 72 हजार सालाना यानी 12 हजार रुपये मासिक दिए जाने की घोषणा हुई। इस योजना के तहत यदि कोई 7 हजार कमा रहा है, तो उसे 12 पूरे करने के लिए 5 हजार रुपये दिए जाएंगे। जनता को कांग्रेस का ये फॉर्मूला बिल्कुल भी पसंद नहीं आया। इस योजना पर राहुल और प्रियंका अलग-अलग बयान देते थे। कभी वो 72 हजार बोलते थे, तो कभी कोई और आंकडड़ा बोल जाते थे। कुल मिलाकर जहां से इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ शुरु किया था, राहुल गांधी वहीं से गरीबी हटाओ शुरु कर रहे हैं। न्याय योजना के जवाब के लिए मोदी सरकार की पहले से ही योजनाएं चल रही हैं। जिसमें उज्ज्वला गैस योजना आम जन को प्रभावित कर गई। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में सौभाग्य योजना के तहत बिजली का मुफ्त में कनेक्शन मिलने लगा। घर-घर शौचालय भी बने। इससे आम जनता में एक भरोसा पैदा हुआ।


साथ ही न्याय योजना के जवाब में सबसे बड़ी खास बात ये रही कि जब तक राहुल गांधी 72 हजार देंगे। तब तक मोदी सरकार ने हर गरीब किसान की जेब में पीएम किसान योजना के तहत दो हजार रुपये पहुंचा चुके थे। ऐसे में जनता ने आज नगद कल उधार वाले सिस्टम पर भरोसा करना बेहतर समझा।


राहुल गांधी अम जनता पर भरोसा इस लिए नहीं पैदा कर पाए, क्योंकि हाल ही में  तीन हिंदी पट्टी राज्यों में किसानों के कर्जमाफी का जो वादा किया था, वो अभी तक पूरा नहीं हुआ। जबकि राहुल गांधी अपने भाषणों में यही कहते रहे कि सरकार बनने के 10 दिनों के भीतर कर्ज माफ हो जाएगा। जबकि सरकार बनते ही कई किसानों को लोन भरने के लिए नोटिस मिलना शुरु हो गया। छत्तीसगढ़ में हालात बदतर रहे। धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में विधान सभा चुनाव के दौरान चावल के दाम 2500 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य का वादा कांग्रेस ने किया। जबकि उस समय मूल्य 1800 रुपये प्रति क्विंटल था। कांग्रेस के जीतने के बाद छत्तीसगढ़ में चावल की खरीद नहीं हुई। कुल मिलाकर कांग्रेस के दावे हिंदी पट्टी क लिए खोखले साबित हुए।


न्याय योजना को कांग्रेस विशेष अभियान बनाकर भी चलाया, इस न्याय योजना में कुल पांच करोडों लोगों को लक्ष्य में रखा गाया था। इसको कैसे दिया जाएगा, इसका कोई मानक कांग्रेस के पासल नहीं था। लिहाजा ठोस रणनीति और आम जनमानस में विश्वास नहीं बना पाने के कारण मतदाताओं ने कांग्रेस की इस न्याय योजना को तवज्जो नहीं दी। 


  
और इस प्रकार से युवराज जैसे नामचीन हीरो के बीच न्याय (फिल्म) फ्लॉप हो गई।