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स्मृति ईरानी हैं 'The Giant Slayer of 2019', लेकिन असली कहानी क्या है

प्रकाशित Fri, 24, 2019 पर 16:50  |  स्रोत : Moneycontrol.com

लोकसभा चुनावों में एनडीए और बीजेपी की ऐतिहासिक जीत की हेडलाइन के नीचे एक और सुर्खी है, जो उतनी ही हलचल मचा रही है। नरेंद्र मोदी की विशाल जीत के अलावा एक और जीत है, जो उतनी ही बड़ी है।


उत्तर प्रदेश में गांधी परिवार के गढ़ अमेठी में बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इतिहास लिख दिया है। स्मृति ईरानी को नया खिताब मिला है। लगभग हर दूसरे अखबार ने उन्हें The Giant Slayer का दर्जा दिया है। स्मृति ने आसमान में निशाना लगाया है, जो निशाने पर लगा भी है।


ये बात खुद जीत के बाद स्मृति ने कही। उन्होंने ट्विटर पर दुष्यंत कुमार की मशहूर पंक्तियां लिखीं- कौन कहता है आसमान में सूराख नहीं हो सकता... स्मृति ने आसमान में सूराख ही किया है। उन्होंने यहां से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को 55,000 से ज्यादा वोटों के मार्जिन से हराया है।


The Giant Killer या The Giant Slayer of 2019 स्मृति ईरानी इस जीत के लिए पिछले पांच सालों से मेहनत कर रही थीं। उन्होंने 2014 में उस पौधे के बीज अमेठी की धरती में डाल दिए थे, जो एक विशाल लतानुमा पेड़ बनकर गांधी परिवार के आसमान में छेदकर पार कर गया और स्मृति ईरानी ने इन सीढ़ियों पर चढ़कर इस हौव्वे को खत्म कर दिया कि अमेठी गांधी परिवार का किला है और ये सीट हमेशा उनकी ही रहेगी।


यहां स्मृति ईरानी की जीत अहम है, लेकिन इसी बहाने Giant Slayer की कहानी याद आ रही है। Giant Slayer का टर्म इंग्लैंड में 1734 में लिखे गए फेयरी टेल Jack and the BeanStalk से लिया गया है। ये कहानी कई नामों से जानी जाती है- The History of Jack and the Bean-Stalk या Jack The Giant Slayer नाम से बनी फिल्म से।


बच्चों की कहानी कुछ इस तरह है कि जैक नाम के एक साधारण गरीब से लड़के को कुछ जादूई बीज मिल जाते हैं, जो गलती से पानी के संपर्क में आ जाते हैं। इनसे एक बहुत बड़ा सा पेड़ निकलता है जो आसमान को चीरकर उस पार निकल जाता है। जैक को इसके जरिए ऊपर रह रहे जाएंट्स यानी दैत्यों और उनके असीमित खजाने के बारे में पता चलता है। तो होता ये है कि वो कुछ-कुछ खजाना चुराना शुरू करता है और बाद में उसकी दैत्य से लड़ाई होती है, जिसमें वो दैत्य को मार डालता है और हिस्से आए खजाने से अपनी जिंदगी आराम से गुजारता है।


बच्चों की इस कहानी को बाद में कई तरीकों से मॉडिफाई किया गया है। कई एंगल और मॉरल जोड़े गए हैं।


लेकिन एक चीज जो नहीं बदलती, वो ये कि लड़ाई एक गरीब कमजोर लड़के और एक दैत्य के बीच है और जीत लड़के की होती है, इसलिए ये जीत बड़ी है। स्मृति ईरानी ने भी पांच सालों तक अमेठी में लगकर लोगों को विश्वास दिलाया कि वो ये धारणा तोड़ सकती हैं कि अमेठी में गांधी परिवार को हराना मुश्किल है। वो लगातार यहां की जनता से कनेक्ट करती रहीं। उन्होंने यहां लोगों को विश्वास दिलाया कि वो यहां रुकने के लिए आई हैं। वहीं राहुल गांधी के केरला के वायनाड से लड़ने के फैसले को उन्होंने यह कहकर खूब भुनाया कि वायनाड से जीतने के बाद राहुल अमेठी छोड़ देंगे।


वोट का मार्जिन भले ही बहुत ज्यादा न हो, लेकिन ये जीत कांग्रेस के बहुत भीतर तक जाएगी।