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बजट से निराश रियल एस्टेट सेक्टर, जानिए क्या घर खरीदना अब है फायदेमंद

प्रॉपर्टी की सभी जरूरी जानकारी के साथ-साथ हम आपको देंगे, आपकी प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट से जुड़े सवालों के जवाब।
अपडेटेड Feb 09, 2020 पर 13:22  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

प्रॉपर्टी की सभी जरूरी जानकारी के साथ-साथ हम इस शो में आपको देंगे, आपकी प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट से जुड़े सवालों के जवाब, आपके सवालों के जवाब देंगे जेएलएल के नेशनल फर्म डायरेक्टर, मोहम्मद अस्लम लेकिन सबसे पहले जानेंगे बजट में रियल एस्टेट सेक्टर को मिला है।


इस बार बजट में हाउसिंग और रियल एस्टेट सेक्टर को बजट से सीधे सीधे कुछ खास नहीं मिला। लेकिन अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए पहला घर खरीदने पर जो इंटरेस्ट सबवेंशन मार्च में खत्म हो रहा था, वो अब एक साल और जारी रहेगा। इसके अलावा डेवलपर को प्रॉफिट पर 100 फीसदी टैक्स डिडक्शन की योजना भी एक साल आगे तक जारी रहेगी।


बजट में कैपिटल गेन पर छूट सीमा बढ़ा दी गई है। सर्किल रेट में छूट 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दी गई है। भाव सर्किल रेट से 10 फीसदी कम होने पर फायदा मिलेगा। बिक्री की रकम इनकम में जोड़ी जाएगी।


सरकार उम्मीद कर रही है कि इन दोनों कदमों से डिमांड बढ़ाने में मदद मिलेगी और हाउसिंग फॉर ऑल का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। अभी 1 अप्रैल, 2019 से 31 मार्च, 2020 तक छूट थी जिसे 31 मार्च 2021 तक जारी रखा गया है। सरकार ने सस्ते घरों में डिमांड बढ़ने की उम्मीद में ये  छूट जारी रखी है। अफोर्डेबल हाउसिंग में बिल्डर्स की छूट भी जारी है। सेक्शन 80IBA में प्रॉफिट पर 100% टैक्स डिडक्शन होगा। मार्च 2021 तक 80IBA के तहत छूट जारी रहेगी। हाउसिंग फॉर ऑल के लक्ष्य के लिए कदम उठाया गया है। इससे सस्ते घरों में डेवलपर्स की रुचि बनी रहेगी।


JLL के इंडिया हेड-मिड मार्केट, मोहम्मद असलम का कहना है कि बजट में रियल एस्टेट सेक्टर को काफी ज्यादा उम्मीदें थी। इस बजट में प्रॉपर्टी बाजार के हाथ निराशा लगी है। वित्त मंत्री के पिटारे से  प्रॉपर्टी बाजार के लिए कुछ खास नहीं निकला। हालांकि सस्ते घरों पर अब भी फोकस बरकरार है लेकिन सरकार चाहती है कि प्रॉपर्टी के दाम घटाना चाहती है सरकार को लगता है कि डेवलपर्स को ज्यादा मार्जिन मिल रहा ह लेकिन डेटा देखा जाए तो कई नामी बड़े डेवलपर्स ने अपने प्रोजेक्ट के दाम में काफी कटौती की है। बजट में मेरिट के हिसाब से फंडिग की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सिंगल विंडो क्लियरेंस अभी तक लागू नहीं हुआ है।


बाजार को उम्मीद थी कि डेवलपर की दिक्कतें कम करने की कवादत होगी। जमीन की उपलब्धता बढ़ानी पर किसी तरह की चर्चा होगी। बाजार को चाहिए कि शहरों के बाहरी हिस्सों में भी डेवलपमेंट हो। इंफ्रास्ट्रक्चर का दायरा बढ़ाना होगा।


मोहम्मद असलम के मुताबिक नई टैक्स प्रणाली से घर खरीदार दूर होगा। इनकम टैक्स व्यवस्था से दुविधा बढ़ी है। हालांकि सरकार ने नए टैक्स स्लैब और पुराने टैक्स स्लैब का विकल्प दिया है लेकिन उससे लोगों में केवल कंफ्यूजन ज्यादा है। अब टैक्स बचाने के लिए घर खरीदने का विकल्प नहीं है। सरकार अगर अच्छे काम कर रही है तो उसे लोगों को समझाने की जरुरत है लेकिन सरकार बिना समझाएं ही लोगों पर अपने एलानों को पूरा करने का दबाव डालती है।


सवालः पुणे मामुर्डी में गोदरेज का फॉरेस्ट ग्रुव और महालुंगे में गोदरेज हिल साइड प्रोजेक्ट पसंद आया है। 7-10 साल में इस इलाके में डेवलपमेंट की क्या उम्मीदें हैं? अगले 2-3 साल में रेंटल रिटर्न के मौके जानने हैं।


जवाब: पुणे रहने के लिए बेहतरीन शहर है। वहां रेंटल हाउसिंग की डिमांड तेज है।  हिंजेवाडी, बाणेर से नजदीक निवेश करना फायदेमंद होगा। गोदरेज काफी नामी गिरामी डेवलपर है। कंपनी बढ़िया क्वालिटी और समय पर पजेशन देती है। महालुंगे में निवेश करना बेहतर होगा। मामुर्डी के मुकाबले महालुंगे महंगा है। बाणेर और हिंजेवाडी को जोडते रास्ते में महालुंगे इलाका है। बाणेर एक्सटेंशन के तौर पर महालुंगे उभर रहा है। 


सवालः तलोजा फेज 2, मेट्रो स्टेशन के पास 2BHK लिया है। लेकिन मेट्रो और तलोजा- खारघर फ्लाईओवर का काम लंबा खिंच चुका है। इस निवेश से निकलकर खारघर में रिइन्वेस्टमेंट के मौके जांचने हैं।


जवाब: 2016 में एयरपोर्ट से रियल एस्टेट में तेजी आई है।  खारघर, तलोजा, रोडपल्ली हॉट प्रॉपर्टी डेस्टिनेशनहै। एयरपोर्ट बनने में लंबा समय है। मेट्रो का काम अटका पड़ा है। ट्रान्स हार्बर एलान के बाद काम शुरू होने में देरी होगी। सभी इन्फ्रा प्रोजेक्ट का काम धीमा चल रहा है। पैसे की जरुरत ना हो तो निवेश में बने रहें। रिइन्वेस्टमेंट के लिए खारघर रोडपल्ली, ऐरोली जैसे इलाके है।


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