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बजट में मिली छूट के बावजूद 75-plus के बुजुर्गों के लिए I-T returns फाइल करना रहेगा बेहतर, जानें वजह

बजट में आईटी रिटर्न फाइल करने से बुजुर्गों को मिली छूट के साथ कई शर्तें लगी हैं जिन पर सफाई की जरूरत है
अपडेटेड Feb 12, 2021 पर 18:51  |  स्रोत : Moneycontrol.com

75 साल और उससे ज्यादा  आयु के बुजुर्गों के लिए बजट-2021 में एक छूट का एलान किया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने बजट भाषण में कहा कि 75 साल से ज्यादा के करदाताओं को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से छूट मिलेगी। ये एलान कागज पर तो अच्छा लगता है लेकिन इसके साथ तमाम शर्तें लगी हुई हैं। आइए देखते हैं कि ये पूरी प्रक्रिया क्या वैसी ही है जैसी सुनने में लगती है।


जानें बजट में क्या कहा गया


बजट भाषण में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि हम 75 साल या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गो पर से कानूनी पचड़ो का बोझ कम करने जा रहे हैं। हम ऐसे सीनियर सिटीजन जिनको सिर्फ पेंशन और ब्याज से आय होती है आईटी फाइल करने से छूट देने जा रहे हैं। उनका पेएिंग बैंक, उनके आय पर लागू होने वाले टैक्स स्वत: काट लेगें।


आइए हम इस ऐलान पर एक नजर डालते है


वित्त मंत्री के इस ऐलान का मतलब यह नहीं है कि पेंशन और ब्याज आय से कमाई हासिल करने वाले 75 साल या उससे ज्यादा आय की उम्र वाले बुजुर्गों को इनकम टैक्स चुकाने की जरुरत नहीं है। बहुत सारे सीनियर सिटीजन बजट के इस एलान को सुनकर काफी खुश हो गए थे क्योंकि उनको लगा कि अब उनका इनकम टैक्स चुकाने की जरुरत नहीं है।


सशर्त स्वंत्रता


यह छूट वास्तव में टैक्स चुकाने से नहीं मिली हैं बल्कि यह सिर्फ रिटर्न फाइल करने के लिए मिली है और उसके साथ भी तमाम शर्तें जुडी है। सबसे पहली शर्त यही है कि सीनियर सिटीजन की कमाई का जरिया सिर्फ पेंशन और ब्याज होना चाहिए। कमाई का कोई और दूसरा जरिया नहीं होना चाहिए।


दूसरी शर्त यह है कि यह छूट पाने के लिए पेंशन अकाउंट और फिक्सड डिपॉजिट एक ही बैंक में होना चाहिए जिससे की बैंक सोर्स पर लागू टैक्स की कटौती कर सकें। जिससे की करदाता (assessee) को अलग से टैक्स का भुगतान ना करना पड़े।


तीसरी शर्त यह है कि दो या दो से ज्यादा बैंकों में फिक्सड डिपॉजिट रखने वाले सीनियर सिटीजन को आईटीआर फाइल करने से छूट नहीं होगी। अगर किसी सीनियर सिटीजन को पोस्ट ऑफिस जमाओं और दूसरी फिकस्ड इनकम स्कीमों से आय होती है तो उसको भी आईटीआर फाइल करना होगा।


चौथी शर्त यह है कि ऐसे सीनियर सिटीजन जो म्यूचुअल फंडड, शेयर, इंश्योरेंस स्कीम, डेट इंस्टूमेंट से आय हासिल करते है उनको रिटर्न फाइलिंग से छूट नहीं होगी।


पांचवी और आखिरी शर्त यह है कि राजकोष में ज्यादा टैक्स जमा होने की स्थिति में रिफंड हेतु सीनियर सिटीजन को आईटी रिटर्न फाइल करना होगा। इसके पीछे की सोच यह है कि अगर कोई सीनियर सिटीजन एक से ज्यादा बैंक अकाउंट मैनेज कर सकता है और एक से ज्यादा जरिए  से कमाई कर सकता है तो वह इनकम टैक्स रिटर्न भी फाइल कर सकता है।


क्लीयरटैक्स के अर्जित गुप्ता का कहना है कि इस मुद्दे पर टैक्स डिपॉर्टमेंट से अभी और स्पष्टीकरण की जरुरत है। अभी तक तो यह लगता है कि किसी सीनियर सिटीजन को रिटर्न फाइल से छूट हासिल करने के लिए उसका बैंक अकाउंट, बैंक डिपॉजिट और पेंशन इनकम एक ही स्पेशिफाइड बैंक में होना चाहिए। अलग-अलग बैंकों में अकाउंट रखने वाले सीनियर सिटीजन के लिए आईटीआर फाइल  छूट के सुविधा के लिए हमें सभी बैंकों के इंटरकनेक्टिविटी की जरुरत होगी जिससे की ये बैंक आपस में सीनियर सिटीजन कर दाता के करदायित्वों से संबंधित सूचनाओं का अदान-प्रदान कर सकें।


टैक्स विषयों से जुड़े जानकारों का कहना है कि अभी इस मुद्दे पर आयकर विभाग से और स्पष्टीकरण की जरुरत है। ऐसी स्थिति में 75 साल या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए यहीं बेहतर होगा कि वह अपना रिटर्न फाइल करें क्योंकि आपको इनकम टैक्स से छूट तो मिली नहीं है। ऐसे में अगर आपके पास आईटीआर फाइल करने के लिए सीए है तो आपके लिए आईटीआर फाइल करने में वैसे भी कोई बड़ी मुश्किल नहीं होने वाली है।


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