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रिटायरमेंट के लिए क्या 3.6 करोड़ काफी है? जानिए क्या कहती है यह रिपोर्ट

स्टैंडर्ड चार्टर्ड के मुताबिक, भारत के ज्यादातर लोगों ने माना कि खुश रहने के लिए पैसा जरूरी है
अपडेटेड Dec 19, 2019 पर 16:40  |  स्रोत : Moneycontrol.com

रिटायरमेंट के लिए आपकी प्लानिंग है या नहीं? इसी सवाल का जवाब Standard Chartereds new Wealth Expectancy Report 2019 में बताया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, हर पांच में से तीन लोगों ने अपने भविष्य के लिए फाइनेंशियल स्ट्रैटेजी बनाई है। साथ ही लोगों ने यह माना है कि खुश रहने के लिए पैसा जरूरी है।


स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने यह रिपोर्ट 10 सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था- चीन, हॉन्गकॉन्ग, इंडिया, केन्या, मलेशिया, पाकिस्तान, सिंगापुर, साउथ कोरिया, ताइवान और UAE के 10,000 प्रभावशाली, उभरते हुए HNI से बातचीत के आधार पर तैयार की है। इस सर्वे से पता चला है कि लोग 60 साल की उम्र तक वेल्थ से जुड़ी अपनी सारी उम्मीदें पूरी कर लेना चाहते हैं। 


इस रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया में जितने लोगों पर सर्वे हुआ उनमें से 32 फीसदी लोग 60 साल की उम्र तक अपने 50 फीसदी वेल्थ गोल पूरा कर लेना चाहते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में जो लोग आराम से रहना और खर्च करना चाहते हैं उनकी औसत सेविंग या इनवेस्टमेंट 3.6 करोड़ रुपए है। यानी यह उभरते प्रभावशाली लोगों के लिए 1.3 करोड़, रईसों के लिए 2.6 करोड़ और HNI के लिए 6.9 करोड़ रुपए है।


इसका मतलब है कि रिटायरमेंट के बाद हर महीने औसतन वे 93,000 रुपए चाहते हैं। यह उनकी मौजूदा आमदनी और वेल्थ एस्पिरेशन से कम है। इसमें एक परेशान करने वाली बात यह है कि वो जितनी उम्मीद करते हैं अगर रिटायरमेंट के बाद उतने पैसे खर्च करेंगे तो उनका पैसा रिटायरमेंट के 6 साल बाद ही खत्म हो जाएगा।


भारत में क्यों बचाते हैं पैसा?


भारत में ज्यादातर लोग बच्चों की पढ़ाई के लिए बचत करते हैं। इसके बाद अपना कारोबार शुरू करने, प्रॉपर्टी में निवेश करने और परिवार या किसी रिश्तेदार की मदद करने के लिए सेविंग्स करते हैं।


वेल्थ प्लानिंग की बात करें तो हर 5 में से 3 यानी 60 फीसदी भारतीयों के पास फाइनेंशियल स्ट्रैटेजी है जिनमें इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स भी शामिल है।


हालांकि करीब 49 फीसदी भारतीयों को लगता है कि वो अपने फाइनेंशियल गोल से दूर हैं। सर्वे के मुताबिक, अमीर लोगों में से करीब 64 फीसदी लोगों का कहना है, "वो पैसों की बहुत फिक्र करते हैं जिसकी वजह से उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है।"
 
स्टैंडर्ड चार्टर्ट के सर्वे से एक दिलचस्प बात यह भी निकली है कि 62 फीसदी भारतीयों को इस बात की चिंता होती है कि जो पैसा वो अपने बाद की पीढ़ी को दे रहे हैं, वो उसे कैसे संभालेगी।


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